लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर विवाद ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. और अब ये विवाद एक नई शक्ल के रूप में सामने आ रहा है. जहां पहले रानी पद्मिनी के चित्रण को लेकर करणी सेना जैसे जातीय संगठन आक्रामक विरोध कर रहे थे वहीं अब सेंसर बोर्ड ने पेंच फंसा दिया है.

आपको बतादे कि अब सेंसर चीफ ने साफ किया कि निर्माता एक ऐसी फिल्म को लेकर दबाव बना रहे हैं जो कई मामलों में अधूरी है और नियमों के पर कार्य प्रणाली अपनाई गई. लेकिन किसी फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए सेंसर बोर्ड के पास डॉक्युमेंट जमा किए जाते हैं. डॉक्युमेंट में फिल्म मेकर्स ने इस बात को साफ नहीं किया है कि इस फिल्म की कहानी ऐतिहासिक है।

अधूरे कागजात की वजह से सेंसर ने फिल्म लौटा दी है. अब इसे दोबारा भरकर भेजना होगा. दिलचस्प यह है कि विवाद का एक सिरा यहीं सामने खड़ा होता है. शायद इसी से बचने के लिए निर्माताओं ने इस कॉलम को खाली छोड़ दिया हो. दोबारा पूरी की जाने वाली सेंसर की इस प्रक्रिया में अगर फिल्म को ऐतिहासिक बताते हैं तो निर्माताओं को कई पहलुओं पर डॉक्युमेंटेशन साबित करना पड़ेगा.प्रसून ने बताया फिल्म के डॉक्यूमेंट्स में ये बात भी पूरी तरह साफ नहीं की गई है कि ये एक फि‍क्शन है या हिस्टोरिकल फिल्म है. पेपर्स अधूरे होने और फिल्म की इस जानकारी को ब्लैंक छोड़े जाने के चलते ही सेंसर ने संबंधि‍त कागजात उपलब्ध करवाने के लिए कहा है. हैरानी की बात ये है कि इससे बाद भी सेंसर पर फिल्म के सर्टिफिकेशन को लेकर देरी करने का आरापे लगाया जा रहा है