इस खबर को पड़ने के बाद आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है. लेकिन चौकने की बात बिलकुल भी नहीं है क्युकी ये जो बात है वो बिलकुल सच है. जी हाँ मुस्लिम बहुल राष्‍ट्र होने के बावजूद यहां की करेंसी पर हिंदुओं के पूजनीय ‘गणपति’ अंकित हैं। यहां के चौराहों पर आज भी कृष्ण-अर्जुन संवाद, घटोत्कच, भीम, अर्जुन की प्रतिमाएं मिलती हैं।

आपको बतादे कि इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक देश है। करीब 17508 द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग 23 करोड़ है। यह दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बौद्ध आबादी वाला देश है। इसकी जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, पूर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों में सिंगापुर, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है।

इतना ही नहीं भारत के पुराणों में भी इसका जिक्र ‘दीपांतर’ भारत अर्थात सागर पार भारत के रूप में किया गया है। यहां यह नाम आज भी काफी प्रचलित है। यहां की करेंसी पर गणपति का चित्र अंकित होने के साथ-साथ आपको यह जानकर भी हैरत होगी कि यहां के मुसलमानों के संस्कृत नाम होते हैं। इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्ण थे।

चौथी शताब्दी ईसा पूर्व तक ये सभ्यता काफी उन्नति कर चुकी थी। ये हिंदू धर्म मानते थे और ऋषि परम्परा का अनुकरण करते थे। यहां के चौराहों पर आज भी कृष्ण-अर्जुन संवाद, घटोत्कच, भीम और अर्जुन की प्रतिमाएं मिलती हैं। यहां के राजवंश इस बात की तसदीक करते हैं। जिसमें श्रीविजय राजवंश, शैलेन्द्र राजवंश, सञ्जय राजवंश, माताराम राजवंश, केदिरि राजवंश, सिंहश्री, मजापहित साम्राज्य का नाम शामिल है।