जहाँ एक तरफ केंद्र और ज़्यादातर जगहों पर भाजपा सरकार है। और केंद्र की मोदी सरकार हर दम बस एक ही बात करती है. सबका साथ और सबका विकास की बात करती है. जहाँ देश में बेरोज़गारों की संख्या दिनो दिन बढ़ती जा रही है। फ़िलहाल यह केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

हालाँकि तमाम सरकारे दावा करती आयी है की उन्होंने अपने कार्यकाल में सबसे ज़्यादा नौकरियाँ दी। लेकिन सच यही है की फ़िलहाल शिक्षित युवा नौकरी के लिए दर दर भटक रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश में निकली चतुर्थ श्रेणी की नौकरी के लिए उमड़ा जनसैलाब इसकी एक बानगी भर है। एक पढ़ा लिखा युवक किसी भी स्तर की नौकरी पाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है.

लेकिन हमारी सरकारें चैन की नींद सो रही है। उन्हें बसो और इमारतों के रंग बदलवाने और मदरसों के लिए नए नए निर्देश जारी करने से फ़ुर्सत ही कहाँ है। कभी सत्ता से बाहर रहकर जिन लोगों ने आंदोलन किए वही लोग आज आंदोलन के नाम से भड़क जाते है। जिन युवाओं के कंधो पर पैर रखकर ये लोग सत्ता तक पहुँचे।

इस बारे में एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार ने भी तंज कसा है। उन्होंने कहा कि मंत्री जी ने बेरोज़गार युवकों को आइना दिखाने का काम किया है। उत्तराखंड में क़रीब 12 हज़ार युवक नौकरी की माँग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने राज्य मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाक़ात की। लेकिन मंत्री जी उनसे मिलकर भड़क गए। उन्होंने ग़ुस्से में लाल होकर कहा की मैंने अख़बार में पढ़ा है की तुम मेरा विरोध कर रहे थे।