जानिए क्यों रमज़ान में शर्मिंदा होती है मुस्लिम औरतें

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ल ही में सोशल मीडिया पर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमे आपको बतादें कि माहवारी से गुज़र रही मुस्लिम महिलाएं रोज़ा नहीं रखती हैं. सोशल मीडिया पर ऐसी महिलाएं रमज़ान के दिनों में खाने की चुनौतियों के बारे में चर्चा कर रही हैं. कुछ महिलाओं का कहना है कि वो छुपकर खाती हैं ताकि घर के पुरुषों को पता न चले जबकि अन्य का कहना है कि उन्हें माहवारी के बारे में झूठ बोलना पड़ता है.

वहीँ कुछ लोग इस समस्या को स्वीकार ही नहीं करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये इस्लाम धर्म को नकारात्मक तरीके से दिखाता है. लेकिन ये समस्या तो है. रमज़ान के महीने में मुसलमान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं. इस दौरान वो न कुछ खाते हैं और न ही कुछ पीते हैं. लेकिन माहवारी से गुज़र रहीं महिलाएं रोज़े नहीं रख सकती हैं.

इतना ही नहीं रमज़ान के महीने में वो माहवारी के बारे में अपने परिजनों से बात नहीं कर सकती हैं और इन्हें ये बात छुपानी पड़ती है. एक 21 वर्षीय ब्यूटी ब्लॉगर कहती हैं मेरी मां मुझसे कहती थीं अगर माहवारी हो रही है तो पुरुषों को पता न चले सिर्फ़ घर की लड़कियों को पता चले. मैं जब भी पानी पी रही होती और पिता को आते हुए देखती तो अपना गिलास रख देती और चली जाती.

सोफ़िया कहती हैं कि माहवारी एक ऐसा विषय है जिसके बारे में उनकी मां भी बात करते हुए शर्माती थीं और किशोरावस्था तक उन्होंने इस बारे में उन्हें नहीं बताया था. वो कहती हैं, “मुझे लगता है कि महिलाओं को माहवारी को स्वीकार करना चाहिए और इस बारे में जो लोगों की मानसिकता है वो बदलनी चाहिए. इस बारे में और बात होनी चाहिए।

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