हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बड़ी खबर सामने आ रही जिसमे आपको बतादें कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की ऐतिहासिक मुलाक़ात पर दुनियाभर से मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. कुछ देशों ने इस मुलाक़ात का बहुत ऐहतियात बरतते हुए स्वागत किया है, वहीं कुछ देशों ने इसमें जताई गई प्रतिबद्धताओं की आलोचना की है.

इतना ही नहीं दक्षिण कोरिया का कहना है कि इस मुलाक़ात ने शांति और आपसी सहयोग का एक नया अध्याय आरंभ किया है. लेकिन उसे राष्ट्रपति ट्रंप की इस घोषणा से हैरानी हुई है कि अमरीका ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास ख़त्म कर दिया है. ये उत्तर कोरिया की एक प्रमुख मांग भी थी.

आपको बतादें कि चीन ने कहा है कि दोनों नेताओं की मुलाक़ात से उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों में राहत का रास्ता साफ़ हो सकता है. ईरान ने कहा है कि उत्तर कोरिया को अमरीका पर भरोसा नहीं करना चाहिए. राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ हुए परमाणु करार को ख़त्म कर चुके हैं. रूस ने भी इसी तरह की चेतावनी दी है, जबकि जापान ने इसे सिर्फ एक शुरुआत बताया है.

वहीँ दूसरी और दक्षिण कोरिया में ब्रितानी राजदूत रहे वारविक मौरिस का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने जिस समझौते पर दस्तख़त किए हैं, उसमें स्पष्टता की कमी है, लेकिन दोनों मिले हैं, यही बहुत बड़ी बात है. अमरीकी सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने कहा है कि किम जोंग उन के साथ राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाक़ात तभी सफल होगी, जब इससे कोई ठोस नतीजा निकलेगा.