इन दिनों सोशल मीडिया पर जो स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है. अब उस स्क्रीनशॉट को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. स्क्रीन शॉट धड़ल्ले से वायरल मार्किट में घूम रहा है, नाम है रजिया बानो, पाकिस्तान की फातिमा यूनिवर्सिटी (जो की पकिस्तान में चलनी से छानने पर भी नहीं मिलेगी) से हिंदी पढ़ी हुई हैं, शुद्ध नहीं बल्कि कट्टर हिंदी, जी हाँ कट्टर हिंदी इसलिए की पाकिस्तान में रहते हुए भी वो हिंदुत्व की पक्षधर रही है, इस्लाम विरोधी टिप्पणियां करने पर पकिस्तान गवर्नमेंट उन्हें आर्थिक और सामजिक संरक्षण देती होगी शायद.

ये स्क्रीन्शोट रजिया के नाम से वायरल हो रहा है, जिसमे एक विशेष प्रकार की मानसकिता सामने आ रही है.एक सोच, जो लोगो को एक दुसरे का कातिल बना देगी, एक एसी सोच जो हिन्दुस्तान के अमन के लिए खतरा है, ये कौन लोग हैं हमने इसकी पड़ताल करने के लिए रजिया बनो की फेसबुक आईडी को सर्च मारा, ध्यान दें की ये नाम “रजिया” है न की “रज़िया”, “रज़िया” एक अरेबिक वर्ड है. जिसका उर्दू अनुवाद होता है मुतमईन. हिंदी में संतुष्ट.

जब रजिया की प्रोफाइल पर गये तो हमने सोचा कि उन्होंने जिस तरह की पोस्ट की हैं, इससे पहले भी उन्होंने इस तरह से कोई पोस्ट जरूर की होगी, हमारा शक सही निकला, उनकी पूरी प्रोफाइल साम्प्रदायिक नफरतों से भरी पड़ी थी, लेकिन हमारी आँखें तब फटी रह गयी जब उनकी एक पोस्ट पर हमने हैरत अंगेज कमेन्ट पढ़े, उस पोस्ट को पढ़कर पता चला की वो खुदके जेंडर और धर्म से मुतमईन यानि संतुष्ट यानी रज़िया नहीं थे.

रजिया की फेसबुक चैट को पढ़कर साफ़ जाहिर होता है की ये कोई अजिया रजिया बानो नहीं बल्कि कोई शर्मा जी थे, जिनका नाम पवन है, और इन्होने नहीं सोचा था की उनका ये स्क्रीन्शोट वायरल हो जाएगा, अगर सोचते तो अपनी पुरानी पोस्ट जरूर डिलीट कर देते, इनको इस्लाम अपनाकर मुसलमान बनने की ज्यादा ही जल्दी थी, और लड़की बनने की प्यास और वो भी पाकिस्तानी लड़की, अक्ल की अंधी ये बंदी (सोरी बन्दा) धार्मिक उन्माद फैला कर क्या हासिल करना चाहता है, यही लोग हैं जिन्होंने वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार, और राणा अयूब के नाम से फर्जी ट्वीट और फेसबुक पोस्ट बना कर धार्मिक उन्माद भडकाया और उनपर कीचड उछलने का काम किया है.