बरेली – अपनी कलम से गुमराहियत पर लगाम कसने वाले तथा इतिहास के सबसे चहेते आलिमों में से एक मुजद्दिद हज़रत अहमद रज़ा खान बरेलवी वो शख्सियत है जिनका नाम अहतराम के साथ लिया जाता है. उसी खानदा-ए-नूर के वारिस तथा जानशीन दरगाह हज़रत अख्तर रज़ा खान के गम में जहाँ मुरीदों के आंसू थमने का नाम नही ले रहे हैं, वहीँ कुदरत ने भी मुरीदों का इम्तेहान लेने के लिए पूरी जोर अजमाईश की. मूसलाधार बारिश में कमर तक पानी में डूबे लोगो का हुजूम ऐसी अकीदतमंदी के साथ खड़ा रहा है जैसे खुद ताजुश्शारिया उनके सामने जलवानुमा है.

ऐसी दीवानगी देखी नही कहीं.

इस्लाम मोहब्बत का धर्म है, जिस इस्लाम शब्द के मायने ही खुद को सरेंडर(सौंप) देना है, उस इस्लाम शब्द का असल मतलब अगर दिखा तो वो अजहरी मियां के अंतिम दीदार को पहुंचे लोगो में दिखा, जहाँ बरेली के स्थनीय लोगो ने बाहरी लोगो के लिए अपने दरवाज़े खोल दिया, उन्हें पानी पिलाया, कूलर पखें सड़कों पर रख दिया. अपने पीरो मुर्शिद के गम में मुब्तला मुरीदों की नीची नज़रों से गिरते हुए आंसू दुसरे धर्म के लोगो के दिल को ऐसा पिघला रहे थे की उन्होंने अपनी दुकानों पर खाने पीने की चीज़ों के दाम कम कर दिए, जब गली मोहल्लों से दुरूदों की ग़मगीन आवाज़े आनी शुरू हुई तो बाजारों के शटर भी गिरा कर लोग गमज़दों में शामिल हो गये.

 लाखों के भीड़ लेकिन कोई शोर शराबा नही

ऐसा शायद पहली बार ही देखने में आया है की जहाँ लाखों की तादात में लोग एक जगह इकठ्ठा हो लेकिन वहां ना तो शोर-शराबा सुनने को मिले और ना ही किसी तरह की भागदौड़, चश्मदीदों के मुताबिक लगभग 60 लाख से अधिक लोग दो दिन में ही बरेली पहुँच गये थे, जिनमे देश विदेश से आये हुए मुरीद भी शामिल थे. वैसे आपको बताते चले की अजहरी मियां के दुनियाभर में 3 करोड़ मुरीद हैं.

अकीदत के अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है की जब ताजुश्शारिया की रवानगी हुई तब सड़कों के दोनों तरफ मौजूद लोग अपने मोबाइल कैमरो से विडियो ग्राफी कर रहे थे लेकिन ताजुश्शारिया के पहुँचते ही सबसे मोबाइल खुद नीचे होते चले गये.

जनाज़े बतायेंगे की हक पर कौन है ?

यह रिवायत-ए-इस्लाम में काफी मशहूर पंक्ति इस्तेमाल की जाती है, जो की अजहरी मियां के आखिरी दीदार को उमड़ी भीड़ से सही साबित होती मालूम होती है.

एक साथ लाखों लोगो ने पढ़ा सलाम 

स्थानीय कॉलेज के मैदान में नमाज़-ए-जनाज़ा के अदा करना तय हुआ था लेकिन लोगो की भीड़ इतनी थी की रात से ही स्कूल का मैदान खचाखच भरा हुआ था, आस-पास के मोहल्लो की छतों पर , दीवारों पर और बराबर में गर्ल कॉलेज में मैदान में भी लोग भरे हुए थे.

नमाज़ के बाद नबी(स.अ.व्) पर दुरूद-ओ-सलाम का नजराना पेश किया गया जहाँ एक बार फिर रिकॉर्ड बनता हुआ नज़र आया. शायद यह पहली बार था जब इतनी बड़ी तादात में लोगो ने एक साथ खड़े होकर नबी(स.अ.व्) पर “या नबी सलाम अलेइका, या रसूल सलाम अलइका” पढ़ा. विडियो देखें