‘राग देश की आग’

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अभी कुछ समय पहले राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू ने राज्यसभा टेलीविजन द्वारा हिंदी फीचर फिल्म के बनाने के मामले सहित चैनल में हुए आज तक के सारे खर्च को देखने के लिए एक समिति का गठन करने का फैसला किया। राज्यसभा टेलीविजन पूरी तरह से ऊपरी सदन के स्वामित्व वाली, राज्यसभा सचिवालय को मिलने वाले सार्वजनिक धन से पोषित एक उद्यम है।

2 अगस्त, 2018 के इस आदेश में कहा गया है कि यह “एक सदस्यीय जांच समिति” स्थापना के बाद से अब तक राज्यसभा टेलीविजन (आरएसटीवी) में हुए खर्च खासकर पूर्व सभापति हामिद मुहम्मद अंसारी के कार्यकाल के आखिरी वक़्त में फीचर फिल्म “राग देश” के निर्माण पर किए गए व्यय की जांच करेगी।

जांच राज्यसभा सचिवालय के सचिव, डॉ पी पी के रामाचार्युलू  द्वारा की जाएगी। सचिवालय में कार्यरत निर्देशक धर्मेंद्र कुमार मिश्रा उनकी सहायता करेंगे। पैनल को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है।

लेकिन इससे कुछ खास बाहर आने की उम्मीद नहीं होनी चाहिए। रामाचार्युलू को ज़ाहिरी तौर दिखने वाली फ़िल्मी दुनिया के आगे शायद ही कोई अनुभव हो। खासकर फिल्म प्रोडक्शन से जुड़े निर्माण की बारीकियां, लागत, खर्च, पेशेवर गतिविधि और उनके दाम के कामों को संभालने का उनको कोई तजुर्बा नहीं है। हाल-फिलहाल वो सचिवालय में कार्मिक अनुभाग का संचालन कर रहे हैं। अलावा इसके उनके पास  एस्टेट, समिति अनुभाग (एमपीएलडीएस); भर्ती, प्रश्न शाखा, समिति समन्वय अनुभाग और ऐसे तमाम विभाग है। यूँ तो उनके नाम के आगे रामचारायुलु को राज्यसभा टेलीविजन चैनल का प्रभारी भी बताया गया है लेकिन वो एक महज़ खानापूर्ति है क्योंकि सचिव होने के नाते कायदे से सभी फाइल उनके पास जाना एक कागज़ी कायवाही से ज़्यादा कुछ नहीं। और ये ज़िम्मेदारी भी  हाल ही में, नायडू के सभापति बनने के बाद ही रामचार्युलू को दी गयी है।

उधर मिश्रा, जिसको कि इस जांच में  रामचार्युलू की सहायता का ज़िम्मा दिया गया है, केवल एक निदेशक है और फिलहाल एस्टेट अकाउंट्स, बजट सेक्शन और फाइनेंस सेल की ज़िम्मेदारी देख रहे हैं। हैं। और ये सब फीचर फिल्म निर्माण जैसे पेचीदे काम के मुकाबले कहीं सादा है। और सच तो ये है की उनके पास हामिद अंसारी के कार्यकाल के दौरान भी आरएसटीवी में सीधे-सीधे काम का कोई अनुभव नहीं। इस जांच आयोग में मिश्रा क्या सहायता करेंगे देखने में रोचक होगा।

ये डर कि ये जांच जानकारी निकालने से ज़्यादा जानकारी छुपाने के लिए की जा रही कई वजूहात से सही लग रही है।

एक, इसमें शामिल अधिकारियों को फिल्म निर्माण और व्यापार के मुश्किल विषय के बारे में जरूरी ज्ञान नहीं है।

दो, उन्होंने इस जांच में किसी भी स्वतंत्र सदस्य को शामिल करने की कोशिश नहीं की जो इस प्रक्रिया में समिति की मदद कर सके। यहां तक कि किसी को भी साथ नहीं लिया जो कम से कम उन्हें फिल्म निर्माण के विस्तृत क्षेत्र की बारीकियों को समझने में मदद करे। किसी को यह भूलना चाहिए कि फिल्म राग देश बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही थी और 20 करोड़ रुपये के कड़ी मेहनत कमाए सार्वजनिक धन राज्यसभा टी वी ने नाली में बहा दिया गया था। संदेह करने के कई और भी कारण हैं कि जांच सिर्फ आलोचकों का मुँह बंद करने की कोशिश के रूप में खत्म हो सकती है।

राज्यसभा सचिवालय के कर्मचारी वास्तव में यह पता लगाने की कोशिश क्यों करेंगे कि पिछले शासन के तहत ‘खुद उन्होंने’ कितना पैसा बर्बाद कर दिया था। अगर ये राज़ खुला हो तो वे केवल खुद को दोषी ठहराएंगे। तो “एक सदस्यीय जांच आयोग” स्वयं अपने और अपने को और सचिवालय में अपने अन्य साथियों को “आपराधिक आचरण” का दोषी ठहराएगा… बात अजीब लगती है।

इसके अलावा एक और तथ्य यह है कि आरएस सचिवालय ने वर्ष 2015-16 में अपने कर्मचारियों द्वारा पैसे के दुरूपयोग की एक जांच की थी। एक तीन सदस्य समिति ने चैनल में काम कर रहे पत्रकारों और प्रोडक्शन कर्मचारियों का व्यय सम्बन्धी ब्यौरे की जांच की थी। जांच में पंद्रह कर्मचारियों के खर्च को संदेह के घेरे में रखा गया था। 1 मार्च 2017 को अपनी रिपोर्ट जमा करने वाली समिति ने कुछ मामलों में ख़ास ऑब्ज़र्वेशन दी थी। ये कर्मचारी तब भी और अब भी बहुत वरिष्ठ पदों पर काम कर रहे हैं। उनके द्वारा किया गया खर्च का ब्यौरा नकली पाया गया था। हालांकि इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय आरएस सचिवालय वास्तव ने उन्हें बचाने का काम किया। इनमे से कुछ ख़ास मामलों पर एक नज़र डालें।

चैनल के तत्कालीन कार्यकारी निर्माता श्री ओम प्रकाश ने क्रमशः 30000 / – रुपये और 14,400 / – रुपये के दो भुगतान किए थे। जांच समिति ने सम्बंधित बिलों को असंतोषजनक पाया लेकिन सचिवालय के उच्च अधिकारियों ने न सिर्फ आगे जांच नहीं की बल्कि ओम को संदेह से ही बहार कर दिया।

एक अन्य मामले में आरएसटीवी में एसोसिएट कार्यकारी निर्माता नीलु व्यास थॉमस द्वारा जमा किए गए कम से कम तीन बिल संदिग्ध पाए गए। रुपये 3600 /-  की राशि के एक मामले में समिति ने लिखा कि बिल “झूठ का एक पुलंदा” नज़र आता है। इसके अलावा समिति ने  रूपये 12,600/- के लिए एक और बिल को नकली करार दिया था। नीलू के ही मामले में समिति ने 6000/- रुपये के लिए एक और बिल शक के घेरे में रखा था।  लेकिन कार्रवाई करने के बजाय आरएस सचिवालय प्रशासन ने थॉमस को 12,500 / – रुपये की वापसी करने की अनुमति दे दी  और अन्य मामलों पर किसी भी कार्रवाई नहीं की । हालांकि समिति ने इस धनवापसी की अनुमति को मुद्दा बनाते हुए कहा कि धनवापसी राशि स्वयं साबित करती है कि रुपये 12,600/- का भुगतान कभी नहीं किया गया था और सम्बंधित बिल वास्तव में नकली था।

इसी तरह सीनियर गेस्ट कोर्डिनेटर दीप्ति कुणाल वशिष्ठ का मामला भी है। दीप्ती के जमा किये गए 1000/- रुपये के दो बिल संदिग्ध पाए गए। लेकिन नीलु थॉमस की तरह ही सचिवालय ने दीप्ती को 2000 रुपये की वापसी करने की अनुमति दे दी और दंडकारी कार्रवाई से बचा लिया।

अब सवाल यह है कि यदि राज्यसभा सचिवालय 2000 / – से लेकर 50000 / – तक की रकम की दुरूपयोग की अनुमति देने के मामलों में अपराधियों को देता है तो अगर “राग देश” बीस करोड़ का घपला निकले तो क्या वो किसी को दंडित करेंगे, तब जब फिल्म से जुड़े बिलों को स्वीकृत, अनुमोदित करके भुगतान किया जा चूका है। अगर इस पूरी प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी पेयी गयी तो क्या राज्यसभा सचिवालय किसी पर एफआईआर दर्ज करेगा… बड़ी दूर की कौड़ी है। तीन सदस्य समिति की रिपोर्ट पर सचिवालय के आचरण ने साफ़ संकेत दिया कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला।

लेकिन फिर भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।  राज्य सभा का नया सभापति “स्वयंसेवक” है। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रतिनिधित्व करते हैं जो संगठन स्वयं को समाज और राष्ट्र निर्माण का प्रणेता मानता है। राज्य सभा टी वी में नए प्रधान संपादक की नियुक्ति भी नागपुर के निर्देश पर हुयी है तो उम्मीद क्यों न की जाये।

चूंकि एक सदस्य समिति आरएसटीवी में खर्च किए गए हर एक पैसा का लेखा जोखा करेगी तो संभवतः वो तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर फिर से विचार कर जायज़ एक्शन लेगी।

और, हाँ। जब वे ऐसा कर ही रहे हैं तो वे यह भी देखना चाहेंगे कि उनके नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने 9 जून 2018 को अपनी शिमला यात्रा के लिए आरएसटीवी की गाड़ी इस्तेमाल की थी।

वैसे इसी साल सी ई ओ साहेब आगरा ट्रिप पर भी गए थे।

बाक़ी अल्लाह जानता है।