महिलाएं प्रधानमंत्री तो बन सकती हैं लेकिन शंकराचार्य नहीं: स्वामी स्वरूपानंद

0
38

द्वारका शारदा एवं ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने महिलाओं को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होने कहा कि कोई महिला शंकराचार्य पद पर आसीन नहीं को सकती।

उन्होने कहा कि कि महिलाएं अन्य क्षेत्रों के समान राजनीति में तो जा सकती हैं किंतु वे शंकराचार्य जैसी सनातन संस्था की प्रतिनिधि नहीं बन सकतीं। उन्होने कहा, धर्म के ये पद महिलाओं के लिए नहीं हैं। शास्त्रों में ऐसा कोई विधान नहीं है। भगवान आदि शंकराचार्य ने तो अपने ब्रह्मचारी शिष्यों को गद्दी सौंपी थी, जिनमें एक भी महिला नहीं थी।

शंकराचार्य ने कहा, आजकल लोगों को लग रहा है कि जब महिला राजनीति कर रही है, फौज में जा रही है, हवाई जहाज उड़ा रही है तो फिर शंकराचार्य क्यों नहीं बने। ऐसे लोगों को लगता है कि यह कोई लाभ का पद है, लेकिन शंकराचार्य की कोई तनख्वाह नहीं होती। उन्हें भ्रमण करके भिक्षा लेनी होती है, सनातन धर्म के विरुद्ध कोई बोले तो उत्तर देना होता है। उन्हें मठ बनाकर निवास नहीं करना है। क्या यह महिला शंकराचार्य के लिए संभव है।

उन्होंने कहा, ‘महिलाएं प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सांसद, विधायक बनें, यह अच्छी बात है. परंतु, कम से कम धर्माचार्यों को तो छोड़ दें। धर्म के यह पद स्त्री के लिए नहीं हैं। उन्होंने अपनी बात सिद्ध करने के लिए तर्क भी दिया कि जो संविधान एक देश में लागू होता है, वह उसी रूप में दूसरे देश में लागू नहीं हो सकता. उसी प्रकार, किसी को शंकराचार्य बना देने की व्यवस्था मान्य नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि आजकल बहुत सी महिलाएं जिन्हें लोग संत कहते हैं, वे प्रवचन की जगह नाच-गाना करतीं हैं। यह संतों के लक्षण नहीं हैं। इससे धर्म का रूप दूषित होता है। धर्म में पाखंड का मेल नहीं होना चाहिए। धर्म के नाम पर चमत्कार दिखाना भी गलत है, चमत्कार तो जादूगर भी करता है पर वह धर्म गुरु नहीं हो सकता।

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, ‘अखिल भारतीय विद्वत परिषद के नाम से खड़ी की गई संस्था नकली शंकराचार्य गढ़ने का कार्य कर रही है। यही नहीं, इसने पिछले दिनों नेपाल में पशुपतिनाथ के नाम से एक नई पीठ ही बना डाली। जबकि, इस तरह की कोई पीठ नहीं रही है।’