ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में अमेरिका के ख़िलाफ़ किया मुक़दमा

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आठ मई को अमरीका द्वारा परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकलने के बाद ईरान ने हालैंग के हेग शहर में स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में अमरीका के विरुद्ध शिकायत दर्ज की थी। अमरीका के विरुद्ध ईरान की याचिका में कहा गया है कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद प्रतिबंधों को दोबारा लागू होना, ईरान-अमरीका दोस्ती समझौते का उल्लंघन है।

ईरान ने परमाणु समझौते से अमेरिका के एकपक्षीय रूप में निकल जाने के बाद, 1955 के ईरान अमेरिका दोस्ती के समझौते के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय में अमेरिका के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। इस समझौते के आधार पर दोनों पक्ष प्रतिबद्ध हुए थे कि कोई भी एेसी कार्यवाही नहीं की जाएगी जो सरकारी या निजी व्यापारिक और आर्थिक हितों को ख़तरे में डाले। इसी प्रकार इस समझौते में यह भी कहा गया था कि यदि दोनों पक्ष कूटनयिक माध्यम द्वारा अपने बीच के मतभेद को दूर नहीं कर सके तो इस विषय को अंतर्राष्ट्रीय अदालत में पेश किया जाएगा।

अभी कुछ दिन पहले ही इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत में अमेरिका के ख़िलाफ़ ईरान का केस बहुत मज़बूत है। उन्होंने कहा था कि भले ही अमेरिका ने परमाणु समझौते से निकलने के बाद दोबारा वार्ता की पेशकश की है लेकिन अमेरिकी सरकार द्वारा इससे पहले भी समझौतों का उल्लंघन किया जा चुका है।

डॉक्टर मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि ईरान ने 1955 के समझौते के आधार पर तमाम आवश्यक क़दम उठाए हैं और समझौते का पूरा सम्मान किया है जबकि अमेरिका ने कई बार उसका उल्लंघन किया है।

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