नई दिल्ली – प्यार मज्हब और जात पात की दीवारों को तोड़ देता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से भारत मे अगर कोई हिन्दू लड़की किसी मुस्लिम युवक से शादी कर लेती है तो उसे कुछ तथाकथित धर्मरक्षक लव जिहाद कहकर उत्पात मचाते हैं। वहीं जब कोई मुस्लिम युवती किसी हिन्दू युवक से शादी कर लेती है तो उसे घर वापसी करार दिया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में एक अजीब ही मामला सामने आया है। यहां एक मुस्लिम युवक ने हिन्दू युवती से शादी करने के लिये अपना धर्म बदल लिया लेकिन उसके बावजूद भी युवती ने उसे ‘धोखा’ दे दिया।

मामला सुप्रिम कोर्ट पहुंचा और युवती ने अपने मां बाप के साथ जाने की इच्छा जताई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी युवती की बात मान ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने बीते सोमवार को युवती से बातचीत की। इससे पहले, कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस को भी निर्देश दिए थे कि वह लड़की की मौजूदगी सुनिश्चित कराए।

सुप्रिम कोर्ट ने इस युवती के पति इब्राहिम सिद्दीकी की तरफ से दाखिल याचिका पर सुवाई की थी। इब्राहीम सिद्दीकी ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया था और अपना नाम आर्यन रख लिया था। लेकिन उसके बाद भी उसे प्रेम में धोखा मिला, मामला रायपुर से 60 किमी दूर धमतरी का है, और यहां रहने वाली अंजलि जैन से शादी करने के लिए इब्राहीम सिद्दीकी ने इसी साल फरवरी में हिंदू धर्म अपना लिया था।

अंजलि जैन के पति इब्राहीम सिद्दीकी उर्फ आर्यन का आरोप था कि उसकी पत्नि के मां बाप उसे लड़की से मिलने नहीं दे रहे हैं। लड़की जब कोर्ट में पेश हुई तो कोर्ट ने इस बाबत कई सारी जानकारियां मांगी। मसलन, लड़की का नाम क्या है? क्या वाकई उनकी शादी हुई? लड़की अपने पति के साथ क्यों नहीं रहना चाहती? जिस पर लड़की ने जवाब दिया था कि वह बालिग है और उसने आर्यन से शादी की, लेकिन वह अपने माता पिता के साथ रहना चाहती है। युवती ने अदालत में कहा कि यह उसकी इच्छा है और उसपर किसी ने किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया है। बेंच ने लड़की के बयान पर विचार किया और हाईकोर्ट के आदेश में परिवर्तन कर दिया। बता दें कि इस मामले में हाईकोर्ट ने लड़की को आदेश दिया था कि या तो वह घरवालों के साथ रहे या फिर हॉस्टल में।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘उसने साफ तौर पर कहा कि वह अपने पति के साथ नहीं जाना चाहती और अपने मां बाप के पास वापस जाना चाहती है। लड़की के बयान के मद्देनजर हम उसे उसके घरवालों के साथ जाने की इजाजत दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम शादी पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। वह बालिग है, वह अपने फैसले लेने के लिए आजाद है और वह जहां चाहे जा सकती है।