झारखंड सरकार को बड़ा झटका – हाईकोर्ट ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर लगे बैन को हटाया

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रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर राज्य सरकार द्वारा फरवरी, 2018 में लगाए गए बैन को सोमवार को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया।

न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय की पीठ ने माना कि उचित प्रक्रिया पूरी किए बगैर संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया था। कोर्ट  ने राज्य सरकार के आदेश को गजट में प्रकाशित किए बिना ही क्रियान्वित किए जाने को अवैध माना। साथ ही कहा कि राज्य सरकार ने वैध ढंग से आदेश नहीं लागू किया।

इसके अलावा कोर्ट ने संगठन के खिलाफ राज्य में दर्ज पुलिस प्राथमिकी को भी खारिज कर दिया। संस्था के महासचिव साहेबगंज निवासी अब्दुल वदूद की याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने कहा कि संगठन को प्रतिबंधित करने के पर्याप्त कारण राज्य सरकार नहीं बता पाई।

संगठन के एंटी सोशल एक्टिविटी में शामिल रहने का उदाहरण भी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाई। संस्था को प्रतिबंधित करने में सरकार ने जल्दबाजी में आदेश जारी कर दिया। बता दें कि 21 फरवरी को संगठन को प्रतिबंधित करते हुए राज्य सरकार ने बताया था कि इस संगठन के कई सदस्य सीरिया गए हैं और आईएसआईएस के लिए काम करते हैं।

इस मामले में बुधवार को राजधानी के एक होटल में पीएफआई के प्रदेश महासचिव अब्दुल वदूद ने कहा कि उनका संगठन देशद्रोही नहीं देशभक्त है। हम लोग स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हैं। वहीं दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यकों के अधिकार के लिए सक्रिय हैं। हाईकोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। न्याय की जीत हुई है। इस फैसले से न्यायपालिका पर जनता के भरोसे को मजबूती मिलेगी।

वदूद ने कहा कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ कानून के दायरे में रहकर आवाज उठाना न गैर कानूनी है और न ही समाज या देश विरोधी। हम राज्य सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक प्रावधानों और हाशिये पर डाले गए वर्गों का सम्मान करने और दबे कुचले वर्गों की परेशानियों को सुनने की अपील करते हैं। अपने सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेवारी है।