कासगंज हिंसा: मुसलमानों को फर्जी तरीके से फंसाकर हिंदुओं का बचाव किया गया?

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उत्तर प्रदेश के कासगंज में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन तिरंगा यात्रा के नाम पर हुई सुनियोजित सांप्रदायिक हिंसा मामले में अब बड़ा सच सामने आया है। एक स्वतंत्र जांच में खुलासा हुआ कि बेगुनाह मुसलमानों को फर्जी तरीके से फंसाकर हिंदुओं को बचाने की कोशिश की गई।

जनता का रिपोर्टर की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 25 मुसलमानों को आरोपी बनाया और दो हफ्ते के भीतर अधिकतर को गिरफ्तार भी कर लिया। जांच रिपोर्ट कहती है कि मोटरसाइकल रैली में शामिल कई लोग सीएम योगी आदित्यानाथ की पार्टी बीजेपी से जुड़े थे। पुलिस ने इस मामले में हिंसा के लिए जिम्मेदार हिंदुओं को बचाव किया और बेगुनाह मुसलमानों को फंसा दिया।

रैली करने वाले दो हिंदू युवकों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि असल में हिंदू ही मुस्लिम युवकों के कार्यक्रम में जबरन अंदर घुसे। इसके सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस ने इसकी छानबीन नहीं की। पुलिस ने बिना किसी जांच पड़ताल के मुसलमानों में से ज्यादातर को मृतक 19 वर्षीय चंदन गुप्ता की हत्या का आरोपी बना दिया गया।

TRUTH OF KASGANJ

Investigative Report Exposes Gaping Holes In FIR/Charge-sheet

Posted by Janta Ka Reporter on Wednesday, August 29, 2018

एफआईआर में चंदन गुप्ता के पिता सुशील को प्रमुख चश्मदीद गवाह बताया गया है जबकि घटनास्थल पर वह मौजूद नहीं था। दूसरे गवाह का कहना है कि उसने कुछ भी देखा नहीं बल्कि कही-सुनी बातें ही जानता है। इसके अलावा कुल 28 आरोपियों में तीन ऐसे भी हैं जिनके घटना के दिन कासगंज से बाहर थे। बावजूद थे। जिनकी सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है। फिर भी पुलिस ने उसे मंजूर नहीं किया।

गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मौके पर तिरंगा यात्रा के दौरान दो समुदायों में भिड़ंत हो गई जिससे तनाव व्याप्त हो गया। इस दौरान दोनों समुदायों की और से जमकर पथराव और आगजनी की गई।

इसके बाद वहां तोड़-फोड़ और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। साथ ही उपद्रवियों ने शहर के कई दुकानों में भी आग लगा दी थी। इस हिंसा में 22 वर्षीय चंदन गुप्ता नाम के युवक की जान चली गई थी, वहीं अकरम नाम के एक युवक की एक आंख फोड़ दी गई थी।