अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट मामले में पूर्व आरएसएस प्रचारकों को मिली जमानत

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राजस्थान उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अजमेर बम विस्फोट मामले के संबंध में जेल में बंद दो पूर्व आरएसएस प्रचारकों को जमानत दे दी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस एम एन भंडारी और दिनेश चंद्र सोमानी की पीठ ने वकील मनोज शर्मा और अन्य के तर्क के बाद जमानत दी, जिसमे उन्होने कहा कि उन्हें परिस्थिति संबंधी सबूतों पर सजा सुनाई गई है।

पिछले साल 22 मार्च को, देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल को विशेष एनआईए अदालत ने आजीवन की सजा सुनाई थी और क्रमश 5000 रुपये और 10,000 रुपये जुर्माना लगाया। हालांकि न्यायाधीश दिनेश गुप्ता ने दोनों के ब्लास्ट से पहले किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल न होने का हवाला देते हुए मौत की सजा से इंकार कर दिया था।

आरोपियों के वकील शर्मा ने कहा, “एनआईएके फैसले में, बार-बार कहा गया है कि उन्हें ‘मानव संभावना’ के आधार पर दोषी ठहराया जा रहा है। इसलिए, हमने तर्क दिया कि यदि परिस्थिति संबंधी सबूत दृढ़ विश्वास के लिए आधार बनते हैं, तो यह उचित संदेह से परे होना चाहिए। हमने कहा कि यह आपराधिक न्यायशास्र के विपरीत था और उन्हें केवल अनुमानों पर दोषी पाया गया था।”

एनआईए के लिए, लोक अभियोजक अश्विनी शर्मा ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पर्याप्त सबूत हैं जिन पर उन्हें दोषी ठहराया गया था। बता दें कि देवेंद्र 2010 और भवेश 2013 से जयपुर सेंट्रल जेल में सलाखों के पीछे हैं। 2007 में अजमेर दरगाह विस्फोटों में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 15 घायल हो गए थे।

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