शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी को किया इस्लाम से खारिज

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शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी को शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्म आयतुल्लाह अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी और उनके फतवे के अपमान के चलते इस्लाम से खारिज कर दिया गया है।

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, शिया मौलाना कल्बे जव्वाद ने शुक्रवर को लखनऊ में जुमे की नमाज के दौरान कहा जो लोग वसीम रिजवी के मददगार हैं उनका भी बहिष्कार होना चाहिए। कल्बे जव्वाद ने कहा कि मस्जिद की जगह पर सिर्फ मस्जिद ही बन सकती है। उन्होंने कहा कि वसीम रिजवी खुद को गिरफ्तारी से बचाने के लिए ऐसी बयानबाज़ी कर रहे हैं।

बता दें कि बाबरी मस्जिद के मामले में इराक के नजफ स्थित अत्यंत प्रतिष्ठित शिया स्कूल के मुखिया सिस्तानी ने अपने फतवे में कहा था कि मंदिर अथवा किसी अन्य धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए वक्फ की संपत्तियां नहीं दी जी सकतीं। दुनिया भर में शिया मुस्लिमों के बीच सिस्तानी की पहचान एक धार्मिक हस्ती के रूप में मानी जाती है।

सिस्तानी ने ये फतवा कानपुर के शिक्षाशास्त्री डॉक्टर मजहर नकवी के एक सवाल के जवाब में दिया था। हालांकि सिस्तानी के फतवे को खारिज करते हुए रिजवी ने कहा, ‘शिया वक्फ बोर्ड पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वह बाबरी मस्जिद के जो वादी हैं, उनका समर्थन करे। अयातुल्लाह सिस्तानी का यह फतवा उसी दबाव की एक चाल है।

रिजवी ने ये भी कहा शिया वक्फ बोर्ड भारतीय संविधान के हिसाब से काम करेगा। वह आतंकवादियों के दबाव में नहीं आएगा और न ही किसी फतवे के अनुसार काम करेगा।’  उन्होंने कहा, ‘हम किसी मौलवी की राय से बंधे नहीं हैं। राम मंदिर पर उन्हें गुमराह कर यह फतवा जारी कराया गया है।’

रिजवी ने कहा, ‘अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हिंदुओं के लिए आस्था का विषय है और शिया वक्फ बोर्ड देश और समाज के विकास के बारे में सोचता है। हिंदुओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए और मुस्लिमों को किसी का अधिकार नहीं छीनना चाहिए।

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