9 दिन से अनशन पर बैठे हार्दिक पटेल ने लिखी अपनी वसीयत, आंखें भी करेंगे दान

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पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने रविवार को अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के नौवें दिन अपनी वसीयत जारी की है। जिसके तहत उन्होने अपनी संपत्ति को अपने परिजनों और 2015 में आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों के घरवालों के नाम किया है।

हार्दिक ने 2015 में कोटा आंदोलन के दौरान मारे गए 14 युवाओं के परिजनों और अपने गांव के पास एक पंजरापोल (बीमार और पुरानी गायों के लिए आश्रय) के बीच अपनी संपत्ति का वितरण किया है। पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के प्रवक्ता मनोज पनारा ने बताया कि हार्दिक पटेल ने अपने निधन के बाद अपनी आंखें दान करने की इच्छा जताई है।

उन्होने बताया कि तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी और आरजेडी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने पिछले नौ दिनों में पटेल से मुलाकात की है। हालांकि बीजेपी सरकार ने अभी तक हस्तक्षेप नहीं किया है। बता दें कि हार्दिक अपने समुदाय के लिए आरक्षण और किसानों की ऋण माफी की मांग को लेकर अनशन पर हैं।

पनारा ने दावा किया कि पटेल का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। उन्होंने पिछले नौ दिनों से कुछ नहीं खाया है। उन्होंने पिछले 36 घंटों से पानी भी नहीं पीया है। उन्होंने कहा कि पटेल ने ‘अपने खराब स्वास्थ्य के बारे में डॉक्टर की सलाह पर विचार करते हुए’ वसीयत तैयार की है।

हार्दिक की वसीयत के अनुसार, 50 हजार रुपए उनके बैंक खाते में हैं। जिनमें से 20 हजार रुपए उनके माता को मिलेंगे और बाकी उनके पैतृक गांव वीरमगम में स्थित गौशाला को दान किए जाएंगे। हार्दिक पटेल ने अपनी संपत्ति में एक कार, जीवन बीमा पॉलिसी की भी घोषणा की है।

वसीयत के अनुसार, बीमा पॉलिसी, कार और उन पर लिखी जा रही किताब की रॉयल्टी के पैसों को तीन हिस्सों में बांटा जाए। जिसमें से 15 प्रतिशत उनके माता-पिता को, 15 प्रतिशत उनकी बहन को और बाकी 70 प्रतिशत कोटा की मांग को लेकर भड़की हिंसा में मारे गए 14 पाटीदार युवाओं के परिवारों को मिलेगा।