डॉ. शारिक़ अहमद ख़ान

यूपी को चार हिस्सों में बाँटने की चर्चा को फिर हवा मिली है. केन्द्र और यूपी की सरकार बाँटने का फ़ैसला भी ले सकती है. ब्रिटिश काल में यूनाईटेड प्रोविन्सेज़ ऑफ़ आगरा एंड अवध,यूनाईटेड प्रोविंसेज़ ऑफ़ ब्रिटिश इंडिया और यूनाईटेड प्रोविंसेज़ के नाम से जाना जाने वाला ये इलाका आज़ादी बाद सन् पचास में उत्तर प्रदेश कहलाया. जब उत्तरांचल बँटा तो राज्य छोटा हो गया. अब बचे यूपी को चार हिस्सों में बांटने की कवायद हो रही है. जिसमें पश्चिमी प्रदेश, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल शामिल हैं.

अब सवाल उठता है कि उन राज्यों की मांग का क्या होगा जो बहुत पुरानी हैं. तब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में से रूहेलखंड अलग करने के आंदोलन शुरू होंगे. जाट अपना अलग हरित प्रदेश चाहेंगे और शेष बचा पश्चिम प्रदेश कहलाएगा. मतलब पश्चिमी प्रदेश में तीन प्रदेश बनाने का आंदोलन खड़ा हो जाएगा. बुंदेलखंड में से बघेलखंड बनाने की मांग उठेगी. थोड़ा मध्य प्रदेश और थोड़ा बुन्देलखंड का हिस्सा मिलाकर बघेलखंड बनाने का शोर होगा.

पूर्वांचल में सोन प्रदेश की मांग पुरानी है. पूर्वांचल बना तो सोन प्रदेश के लिए अलग आंदोलन खड़ा हो जाएगा. पूर्वांचल में भोजपुरी भाषी भोजपुर राज्य के लिए आवाज़ उठा रहे हैं. वो पूर्वांचल के उन लोगों के साथ नहीं जाएंगे जो अवधी भाषी हैं. तो समझिए कि पूर्वांचल में भी तीन राज्य बन जाएंगे. इसके लिए आंदोलन खड़े होंगे. सियासी लोग सियासी फ़सल काटेंगे. पूरा यूपी पिछड़ जाएगा और बाबुल का मीनार होकर रह जाएगा. बाहुबली हर प्रदेश में हावी हो जाएंगे.

हाँ ,राहत की बात ये होगी कि मुसलमानों को आजतक यूपी का सीएम बनने का मौका नहीं मिला है जो राज्य बँटते ही पूरा हो जाएगा. पश्चिमी प्रदेश और पूर्वांचल में मुसलमान मुख्यमंत्री बनने की संभावना बढ़ जाएगी. सियासी ताश के पत्ते फेटने में माहिर मुसलमान लीडर सीएम बन सकेंगे. जब रूहेलखंड बनेगा तो वहाँ अपवाद छोड़ हमेशा मुसलमान ही सीएम होगा. कश्मीर के बाद ये एक ऐसा प्रदेश होगा जहाँ मुस्लिम बहुमत होगा.

हरित प्रदेश में कभी जाट तो कभी मुसलमान सीएम होगा. पूर्वांचल और भोजपुर में कभी हिंदू तो कभी मुसलमान सीएम होगा. अवध में भी मौका हाथ लग सकता है. बस सोन प्रदेश, बुंदेलखंड और बघेलखंड में कभी मुस्लिम सीएम नहीं होगा जैसे आज यूपी में नहीं होता है. बाकी यूपी से बंटकर बने हर राज्य की गणित में मुसलमान वर्तमान यूपी से दस गुना शक्तिशाली और सत्ता के करीब होगा.

सियासी खेल के माहिर और कम्युनल मुस्लिम दलों का धंधा निकल पड़ेगा और जाति में बंटे समाज का फ़ायदा उठाकर हर सियासी मैच में घुआंधार बैटिंग करेंगे. बाँटिए यूपी को,हमको क्या,हम भी तब ऐसे बैठकर घुईंयाँ नहीं छीलेंगे जैसे आज छील रहे हैं. हम भी सीएम बनकर मानेंगे. जबकि वर्तमान यूपी में तो हम सीएम बनने की सोच भी नहीं सकते.