नोटबंदी के दो साल बाद बेरोजगारी सबसे ऊंचे स्तर पर, नई नौकरियां भी हुई गायब: रिपोर्ट

0
33

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा देश में नोटबंदी लागू किये आज 2 साल पूरे हो गए हैं। साल 2016 में लागू इस फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। एक अध्ययन में सामने आया कि नोटबंदी के बाद से बेरोजगारी का स्तर बढ़कर अक्तूबर माह में 6.9 फीसदी पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा 2 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है।

थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के मुताबिक देश में बेरोजगारी को लेकर हालात बदतर हैं। श्रमिक भागीदारी भी घटकर 42.4 फीसदी पर पहुंच गया है जो जनवरी 2016 के आंकड़ों से भी नीचे है। श्रमिक भागीदारी का आंकड़ा नोटबंदी के बाद बहुत तेजी से गिरा है। उस वक्त यह आंकड़ा 47-48 फीसदी था जो दो सालों के बाद भी हासिल नहीं कर सका।

सीएमआईई के मुताबिक नई नौकरी पाने वालों का भी आंकड़ा गिरा है। थिंक टैंक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2018 में कुल 39.7 करोड़ लोगों के पास रोजगार थे जो पिछले साल यानी अक्टूबर 2017 से 2.4 फीसदी कम है। अक्टूबर 2017 में यह आंकड़ा 40.7 करोड़ था। सीएआईई के मुताबिक एक साल में आई यह कमी लेबर मार्केट में मांग में आई गिरावट की वजह से दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नौकरी पाने की टकटकी लगाए बेरोजगारों के आंकड़ों में भी एक साल में बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2017 के जुलाई में ऐसे बेरोजगारों की संख्या 1.4 करोड़ थी जो 2018 के अक्टूबर में बढ़कर 2.95 करोड़ हो गई। 2017 के ही अक्टूबर में यह आंकड़ा 2.16 करोड़ हो गया था।

सीएमआईई के इन आंकड़ों पर एचआर सर्विसेज सीआईईएल के सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा का कहना है, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अक्तूबर-दिसंबर का समय नौकरी के निर्माण का समय होता है, लेकिन नौकरी की मांग ज्यादा है और नौकरी कम इसलिए इस दौरान यह आंकड़ा इतना चिंताजनक है।’

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें