57 साल बाद तेल उत्‍पादक देशों के संगठन ओपेक से बाहर होगा कतर

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कतर ने गैस उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने के लिये प्रमुख कच्चा तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक से अगले महीने बाहर निकलने का ऐलान कर दिया है।

ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने सोमवार को फैसले के बारे में बताया कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि तकनीकी और रणनीतिक फैसला है। उन्होंने बताया कि कतर प्राकृतिक गैस उत्पादन सालाना 77 मिलियन टन से बढ़ाकर 110 मिलियन टन करना चाहता है। इस योजना पर फोकस करने के लिए ओपेके से बाहर होने का फैसला लिया गया है।

काबी ने कहा, ‘‘कच्चा तेल में हमारे लिये अधिक संभावनाएं नहीं हैं। हम वास्तविकता पर यकीन करते हैं। हमारी संभावनाएं गैस में हैं।’’ बता दें कि कतर ओपेक में 1961 में शामिल हुआ था। ओपेक पर सऊदी अरब का दबदबा चलता है। दोनों देशों के बीच जून 2017 से संबंध खराब चल रहे हैं।

माना जा रहा है कि कतर के फैसले का भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि, भारत के प्रमुख तेल निर्यातक देश ईराक, सऊदी अरब और ईरान हैं। यूएई का चौथा नंबर है। तेल के अलावा भारत के कतर के साथ ज्यादा व्यापारिक रिश्ते भी नहीं हैं।

हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह के भारत को भविष्य में ईरान से आयात घटाना पड़ा तो वह कतर से इंपोर्ट बढ़ाने का विकल्प चुन सकता है। कतर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का दुनिया में सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। दुनिया भर के नेचुरल गैस प्रोडक्शन में इसकी 30% हिस्सेदारी है।

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