‘अब गाड़ियों के धुएँ से बनेगी पेपर प्रिंट की स्याही’

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पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के अक्षय ऊर्जा डिपार्टमेंट के छात्रों ने बड़ा कमाल कर दिखाया है। उन्होने गाड़ी से निकलने वाला धुएँ से पेपर प्रिंट के लिए स्याही बनाने का दावा किया है।

रूमेन्द्र वर्मा, प्रवीण साहू और अनिमेश वर्मा ने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करेगा। साथ ही उससे बचने वाले काले पदार्थ को पेपर प्रिंट और काली स्याही के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

मात्र 10 रुपये की लागत से बने इस मॉडल में एक खाली कोल्ड ड्रिंक की कैन, थोड़ा-सा कॉर्टन और कंडक्टर, जिसमें पतली खाली में रूप लगी होती है, उसे गाड़ी के साइलेंसर में लगाकर उपयोगी बनाया जा सकता है। कोई भी गाड़ी पौन घंटे चलती है तो उसमें से 30 एमएल स्याही तैयार हो जाती है, जिसे आसानी से प्रिंटर में उपयोग किया जा सकता है।

विभागाध्यक्ष डॉ. संजय तिवारी ने छात्रों के इस नए प्रयोग पर कहा कि ये अनोखा प्रयोग है। इससे प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। कोई भी कैन में कॉटर्न और कंडक्टर को लगाकर, उसे डीजल वाले वाहन पर लगा दिया जाए। प्रदूषण वाले 2.5 से 10 माइक्रान के कण स्याही में बदल जाते हैं। वहीं यदि गाड़ी दो हजार घंटे चलती है तो 600 मिलीलीटर तक स्याही तैयार की जा सकती है। छात्रों ने बताया कि इस मॉडल से प्रदूषण के साथ-साथ उपयोगी स्याही भी बनाई जा सकती है।

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