आलोक वर्मा ने छोड़ी नौकरी तो राकेश अस्थाना पर से कोर्ट का FIR रद्द करने से इनकार

0
44

नई दिल्ली. आलोक वर्मा ने सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के एक दिन बाद नौकरी से इस्तीफा दे दिया। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार चयन समिति ने 2:1 से फैसला लेते हुए उन्हें सीबीआई निदेशक पद से हटा दिया था। इसके बाद उन्हें सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होमगार्ड विभाग का महानिदेशक बनाया गया था। 

वर्मा ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेजे इस्तीफे में कहा, ‘‘मैं अपनी सर्विस 31 जुलाई 2017 को ही पूरी कर चुका था और सिर्फ सीबीआई निदेशक के पद पर कार्यरत था। सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होमगार्ड का महानिदेशक बनने के लिए तय आयु सीमा को मैं पार कर चुका हूं।’’ इस्तीफे से पहले वर्मा ने कहा कि झूठे, अप्रमाणिक और बेहद कमजोर आरोपों को आधार बनाकर मेरा ट्रांसफर किया गया। ये आरोप एक ऐसे शख्स ने लगाए हैं, जो मुझसे द्वेष रखता है।

वहीं दूसरी और दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को रिश्वत के आरोपों पर सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इंकार कर दिया। न्यायमूर्ति नाजमी वजीरी ने सीबीआई के उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार और कथित बिचौलिये मनोज प्रसाद के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से भी इंकार किया। उच्च न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया कि अस्थाना एवं अन्य के खिलाफ मामले की जांच दस हफ्ते में पूरी करें। उच्च न्यायालय ने कहा कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ लगे ‘‘दुर्भावना’’ के आरोप साबित नहीं होते।

न्यायमूर्ति वजीरी ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए अस्थाना और कुमार के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पहले से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उच्च न्यायालय ने अस्थाना, कुमार और प्रसाद की याचिकाओं को खारिज कर दिया जिन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी थी। अस्थाना पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धाराओं के तहत आपराधिक कदाचार, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना ने एक मामले में राहत पाने के लिए कथित रूप से रिश्वत दी थी। सना की शिकायत पर ही प्राथमिकी दर्ज हुई है। सना ने अस्थाना पर भ्रष्टाचार, रंगदारी और गंभीर कदाचार के आरोप लगाये थे।

उच्च न्यायालय ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए अस्थाना और कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है।  अंतरिम सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव ने पूर्व निदेशक आलोक वर्मा द्वारा किए गए तबादलों संबंधी फैसले को रद्द कर दिया है और अधिकारियों की आठ जनवरी वाली स्थिति बहाल कर दी है। राव ने शुक्रवार को जारी नए आदेश में घोषणा की कि वर्मा द्वारा दिए गए आदेश ‘‘अस्तिव में नहीं हैं’’।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें