यूपी में फर्जी मुठभेड़ की जांच से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस की कथित फर्जी मुठभेड़ को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर मानते हुए विस्तार से सुनवाई पर ज़ोर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई 12 फरवरी से करेंगे।

वहीं इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार का कहना था कि सारे मामलों की मजिस्ट्रेट जांच हो चुकी है और सभी तरह के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है। जो लोग इन मुठभेड़ों में मा’रे गए हैं उनके खिलाफ कई अपराधिक मामले चल रहे थे।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद 2351 पुलिस मुठभेड़ें हो चुकी हैं। 4 अगस्त 2018 तक राज्य के 24 जिलों में हुई इन मुठभेड़ों में 63 लोगों की मौ’त हो चुकी है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इन मुठभेड़ की कोर्ट की निगरानी या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की निगरानी में सीबीआई या SIT से जांच होनी चाहिए। साथ ही पीड़ितों के परिवारवालों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले की जांच शुरू की है. फिलहाल अब सुप्रीम कोर्ट याचिका पर सुनवाई को सहमत हो गया है।

हालांकि दूसरी और

योगी सरकार कई बार यह दावा कर चुकी है कि राज्य से अपराधियों का सफाया करने के लिए ये मुठभेड़ें जारी रहेंगी। योगी का कहना है कि मुठभेड़ें आगे भी जारी रहेंगी। अपराधियों से सहानुभूति डेमोक्रेसी के लिए घातक है।

पिछले दिनों अखिलेश यादव ने कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार में अगर पुलिस मुठभेड़ के दौरान किसी बेगुनाह की जा’न चली जाती थी, तो सरकार उसके परिजनों को 50 लाख रुपये की मदद करती थी। उन्होंने कहा कि इस सरकार को भी फर्जी एनकाउंटर में जा’न गंवाने वालों के परिजनों को तुरंत किसी भी कीमत पर 50 लाख रुपये की मदद करनी चाहिए।

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