भोपाल: गोतस्करी और गोकशी के नाम पर राज्य की कमलनाथ सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई कर रही है। हाल ही में आगर मालवा जिले में अधिकारियों ने गायों के कथित अवैध परिवहन और सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत मामला दर्ज किया है।

कोतवाली पुलिस थाने के प्रभारी अजीत तिवारी ने बताया, दो आरोपियों उज्जैन जिला निवासी महबूब खान और आगर मालवा निवासी रोदुमल मालवीय को अवैध रूप से गायों को ले जाने और सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि उनकी गिरफ्तारी के बाद एक अदालत ने दोनों को उज्जैन में केन्द्रीय जेल भेज दिया।

आगर मालवा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनोज कुमार सिंह ने इस मामले पर एक रिपोर्ट भेजी थी जिसके बाद जिला कलेक्टर अजय गुप्ता ने उनके खिलाफ एनएसए लगाया था। उन्होंने कहा कि पहले भी महबूब के खिलाफ गायों को अवैध रूप से ले जाने के चार मामले और मालवीय के खिलाफ तीन मामले दर्ज है। इसलिए प्रशासन ने उनके खिलाफ एनएसए लगाया है।

इससे पहले खंडवा जिले में गोकशी के आरोप में तीन मुस्लिमों के खिलाफ रासुका के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रासुका की कार्रवाई को गलत बताया था। साथ ही पूर्व केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी आलोचना की थी।

इसी बीच भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद ने गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों पर भी रासुका लगाने की मांग कर दी है। उन्होंने कहा कि यदि गोहत्या के आरोप में पुलिस रासुका की कार्रवाई करती है तो गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ भी इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के खिलाफ रासुका लगाया गया है, उनके परिजन के मुताबिक उनमें से एक ने भी गोहत्या नहीं की है। इस मामले में कांग्रेस के अंदर ही विरोध पनपने के बाद मुख्यमंत्री को मामला संभालना पड़ा।

वहीं सीएम कमलनाथ ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर मॉब लिंचिंग या गुंडागर्दी करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा। इस बयान से मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस के अंदर पुलिस की कार्रवाई से शुरू हुए विरोध को खत्म करने की कोशिश की है।