करतारपुर कॉरिडोर पर भारत-पाक में बनी सहमति, अगली वार्ता अब 2 अप्रैल को

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नई दिल्ली: पुलवामा आतंकवादी हमले के ठीक एक महीने बाद भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच बैठक हुई. यह बैठक भारतीय सीमा के अंतर्गत अटारी के इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) पर आयोजित हुई. इस बैठक में करतारपुर गलियारे पर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच रचनात्मक वार्ता हुई, दोनों देशों ने करतारपुर गलियारा शीघ्र चालू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई.

भारतीय पक्ष में केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, बीएसएफ, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पंजाब सरकार के प्रतिनिधि शामिल हुई. भारतीय दल का नेतृत्व गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एससीएल दास ने किया जबकि पाकिस्तान की 18 सदस्यीय दल का नेतृत्व पाकिस्तान के विदेश मामलों के मंत्रालय के महानिदेशक (दक्षिण एशिया एवं सार्क) मोहम्मद फैजल ने किया.

दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, अटारी में हुई यह बैठक बेहद ही दोस्ताना माहौल में हुई. बयान में कहा गया, ‘दोनों पक्षों के बीच विभिन्न मुद्दों और प्रस्तावित समझौते के प्रावधानों पर विस्तृत और सकारात्मक वार्ता हुई. दोनों पक्ष करतारपुर साहिब कॉरिडोर का संचालन जल्द से जल्द शुरू करने की दिशा में काम करने को लेकर सहमत हुए.’

बयान में कहा गया, प्रस्तावित कॉरिडोर के समझौते और अन्य विषयों पर दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञों में भी चर्चा हुई. अगली बैठक 2 अप्रैल 2019 को वाघा पर करने की सहमति बनी है. दास ने कहा, ‘भारत ने पाकिस्तान से अनुरोध किया कि वह कॉरिडोर को खुलने की मंजूरी दे और परियोजना के पहले चरण के तहत शुरुआत में कम से कम पांच हजार श्रद्धालुओं की व्यवस्था करने पर जोर दिया. इसमें न केवल भारतीय लोगों बल्कि भारतीय मूल के लोगों को भी शामिल किया जाए.’

उन्होंने कहा, ‘हमने अपनी तरफ से इस बात पर भी जोर दिया है कि करतारपुर कॉरिडोर से जुड़ी भावनाओं को देखते यह बिल्कुल वीजा मुक्त होना चाहिए. किसी भी तरह का अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगकर प्रक्रियाओं को बोझिल नहीं बनाना चाहिए.’ भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से सिख श्रद्धालुओं को कॉरिडोर से गुरुद्वारे तक पैदल जाने की परमिशन देने के लिए भी कहा है, क्योंकि कई श्रद्धालुओं की आस्था होती है कि वो पैदल गुरुद्वारे तक जाएं.

इसके अतिरिक्त पाकिस्तान ने भरोसा दिलाया कि श्रद्धालुओं के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था भी पाकिस्तान की ओर से की जाएगी, क्योंकि गुरुद्वारे तक का सफर करीब साढ़े 4 किलोमीटर का है और रात को करतारपुर में रुकने की किसी को परमिशन नहीं दी जाएगी. इसी वजह से श्रद्धालुओं को उसी दिन वापस लौटना होगा.
इस दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस कॉरिडोर को पासपोर्ट और वीजा फ्री करने की मांग भी पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ उठाई. इसके साथ ही भारत सरकार के अधिकारियों ने भरोसा दिया कि कॉरिडोर को लेकर सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए जाएंगे और इस बात का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा कि कॉरिडोर के माध्यम से किसी तरह की कोई घुसपैठ ना हो.

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