20 साल में पहली बार मुजफ्फरनगर सीट पर कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं

0
117

मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव में 20 साल में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है। जब किसी भी राजनीतिक पार्टी ने मुजफ्फरनगर सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार को नहीं उतारा है। मुस्लिम बहुल इस सीट पर बीते 20 सालों में 15 साल यहां मुस्लिम ही सांसद रहे।

1999 में सईदुज्जमा कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीते। 2004 में मुनव्वर हसन सपा से और 2009 में कादिर राना बसपा से चुनाव में विजयी रहे। 2014 में बीजेपी के डॉ संजीव बालियान ने कादिर राना को हरा जीत का परचम लहराया। हालांकि 1991 में भी ऐसे ही हालात बने थे। भाजपा के नरेश बालियान ने देश के गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को हराया था।

इसके बाद 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशी मुख्य मुकाबले से बाहर हो गए। 1991 से पहले के चुनावों में भी यहां मुस्लिम राजनीति का दबदबा रहा। 1967 में सीपीआई के लताफत अली खां जीते, 1977 में लोकदल के सईद मुर्तजा, 1980 में जनता दल के गय्यूर अली खां सांसद बने। 1989 में मुफ्ती मोहम्मद सईद चुनाव जीते।

1952 से लेकर अब तक केवल सात बार ऐसा हुआ जब मुसलमान मुख्य मुकाबले से बाहर रहा, इनमें तीन चुनाव सबसे शुरू के हैं। सात बार ऐसा हुआ है कि जाट प्रत्याशी यहां मुकाबले से बाहर रहा। न पक्ष में जाट था और न विपक्ष में। मगर इस बार ऐसा पहली बार हो रहा है कि पक्ष और विपक्ष में दोनों प्रत्याशी जाट हैं।

ऐसे में अब मुस्लिम सियासत किनारे पर आकर खड़ी हो गई है। अब देखना होगा कि कोई मुस्लिम राजनीतिक पार्टी यहां अपना उम्मीदवार उतारती है या नहीं।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें