35 साल से गुजरात से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं पहुंचा लोकसभा, टिकट में देने में कंजूसी

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आजादी से लेकर अब तक मुस्लिम उम्मीदवारों को उनकी जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधत्व कभी नहीं मिल पाया। लेकिन अब तो मुस्लिमों को राजनीति से ही किनारे लगा दिया गया है। गुजरात जैसे राज्यों को देखकर यह पूरी तरह से साबित भी होता है।

दरअसल, गुजरात ने आखिरी बार जिस मुस्लिम सांसद को लोकसभा भेजा था, वह कांग्रेस के अहमद पटेल थे। अहमद पटेल इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति की लहर में 1984 में यहां से जीते थे। हालांकि 1989 के चुनाव में वह भरुच सीट बीजेपी के चंदू देशमुख के हाथों हार गए। उसके बाद से आज तक कई लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, मगर गुजरात से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार निर्वाचित होकर लोकसभा नहीं पहुंचा।

बता दें कि गुजरात में मुसलमानों की संख्या 9.5 प्रतिशत है। 1962 में जब गुजरात में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए तो केवल 1 मुस्लिम उम्मीदवार जीत पाया था। इस चुनाव में जोहरा चावड़ा बनासकांठा से चुनाव जीते थे। इसके बाद 1977 में राज्य के दो मुस्लिम उम्मीदवार कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। यह दोनों उम्मीदवार थे बहराइच से एहमद पटेल और अहमदाबाद एहसान जाफरी थे।

गुजरात के भरूच लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। वर्तमान में यहां पर 15.64 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 22.2 फीसदी हिस्सा मुसलमानों का है। लेकिन, इस सीट पर 1962 से लगातार सिर्फ कांग्रेस ने 8 बार मुस्लिम प्रत्याशी उतारे। मगर तमाम मुस्लिम उम्मीदवारों में सिर्फ अहमद पटेल ही चुनाव जीतने में कामयाब रहे। पटेल 1977, 1982 और 1984 तक लगातार तीन बार सांसद रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोधराकांड के बाद 2002 में हुए दंगों के बाद से स्थिति और भी बदल गई। 2014 लोकसभा चुनाव में गुजरात से कुल 334 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 67 प्रत्याशी मुसलमान थे। लेकिन, इनमें से सिर्फ एक उम्मीदवार को कांग्रेस ने टिकट दिया था। बाकी 66 उम्मीदवार निर्दलीय या फिर समाजवादी पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। ये उम्मीदवार पंचामहल, खेड़ा, आणंद, भरूच, नवसारी, साबरकांठा, जामनगर और जूनागढ़ सीट से मैदान में थे।

गुजरात के अलावा देश में भी मुस्लिम प्रतिनिधियों की काफी कमी है। 2014 लोकसभा चुनाव में पूरे देश से 22 मुस्लिम ही विजयी होकर संसद पहुंचे।आंकड़े बताते हैं कि मुस्लिम प्रत्याशियों को मिलने वाला वोट भी चुनाव दर चुनाव घटता ही गया है। 2009 में जहां मुस्लिम उम्मीदवारों को पूरे देश भर में 2.89 करोड़ (6.9%) वोट हासिल हुए, तो वहीं 2014 में यह आंकड़ा 2.78 करोड़ (5%) हो गया। वहीं राज्यों के क्रम की बात करें तो गुजरात के अलावा अन्य राज्यों में भी मुस्लिम प्रतिनिधित्व काफी घटा है।

उदाहरण के तौर पर गुजरात के पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में ही 2009 के मुकाबले 2014 में मुस्लिम उम्मीदवारों को काफी कम वोट मिले। 2009 लोकसभा चुनाव में जहां 114 मुस्लिम उम्मीदवारों ने 13.1 लाख (करीब 3.53%) वोट हासिल किए, तो वहीं 2014 में 127 मुस्लिम उम्मीदवारों को 6.5 लाख (1.34%) वोट मिले। गौर करने वाली बात असम को लेकर है, यहां पर मुस्लिम आबादी 34 फीसदी है। लेकिन, यहां भी 2009 लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2014 में वोट 24.4 लाख से घटकर 19.6 लाख हो गया।

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