दो दिन पहले कथित सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने मुस्लिम महिलाओं और उनके बुर्के को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया है। जिसमे उन्होने बुर्के में मुस्लिम महिलाओं की तुलना जंतुओं से की है। इतना ही नहीं उन्होने ये भी कहा कि उन्हे बुर्के में मुस्लिम महिलाओं से डर लगता है। साथ ही दुनिया भर में बुर्के पर पाबंदी लगा देनी चाहिए।

हालांकि स्वामी अग्निवेश का यह पहला विवादित बयान नहीं है। उनका हमेशा विवादों से नाता रहा है। सुर्खियों में आने के लिए वह कभी हिन्दू तो कभी मुस्लिम धर्म के खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां करते आए है। जिसके नतीजे में उन्हे झारखंड के पाकुड़ में दक्षिणपंथियों के गुस्से का भी शिकार होना पड़ा। हालांकि इस बार उनके निशाने पर मुस्लिम महिलाएं है।

छत्तीसगढ़ के सक्ति में जन्मे स्वामी अग्निवेश के बारें में कहा जाता है कि वह सुर्ख़ियो में आने के लिए कुछ भी कर सकते है। जाने-माने पत्रकार शेखर गुप्ता ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि ”मैं उन्हें 1977 से जानता हूं और इस बीच उनमें कोई बदलाव नहीं आया है। जहां भी कोई मुद्दा और कैमरा मौजूद होगा वो आपको वहां नज़र आएंगे, और फिर वो उसे बीच में ही छोड़ कर आगे निकल लेंगे।” बता दें कि स्वामी अग्निवेश विवादों से भरे रियलटी टीवी शो बिग बॉस कार्यक्रम का भी हिस्सा रह चुके हैं।

स्वामी अग्निवेश और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया

स्वामी अग्निवेश और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का रिश्ता ज्यादा पुराना नहीं है। लेकिन ये रिश्ता काफी मजबूत रहा है। झारखंड के पाकुड़ में दक्षिणपंथियों के हमले के बाद SDPI स्वामी अग्निवेश को अपना मंच प्रदान करती आई है। इस मंच का इस्तेमाल वह आरएसएस और बीजेपी के खिलाफ बोलने के लिए करते है। बीते अगस्त जयपुर में SDPI ने ‘सांप्रदायिकता के खिलाफ जन-सम्मेलन’ के जरिए स्वामी अग्निवेश को अपना मंच प्रदान किया था। हालांकि ये सम्मेलन सांप्रदायिकता के खिलाफ कम बल्कि स्वामी अग्निवेश के समर्थन में ज्यादा था। इस सम्मेलन पर पार्टी ने कौम के लाखों रुपए खर्च किए थे।

ऐसे में अब सवाल उठना लाज़मी है कि जिस कौम के लाखों रुपए से स्वामी अग्निवेश को मंच प्रदान किया गया था। आज वहीं स्वामी अग्निवेश कौम की बेटियों को अपमानित क्यों कर रहे है ? आज इस शख्स को बुर्के में कौम की बेटियाँ जंतु (जानवर) क्यों नजर आ रही है ? बुर्के में कौम की बेटियाँ उस वक्त भी थी जब SDPI के मंच से वह आरएसएस को गरिया रहे थे। हालांकि तालियों की गड़गड़ाहट में उस वक्त उन्हे बुर्के में मुस्लिम महिलाओं से डर नहीं लगा।

सवाल तो SDPI और उनके नेताओं से भी है। आखिर ऐसे शख्स को पार्टी के नेतृत्व ने अपना मंच क्यों दिया। क्या कौम आप को पैसा इसलिए दे रही है कि आप कौम की बेटियों को ही रुसवा करे। वैसे भी सामाजिक कुरीतियों की आढ़ में विभिन्न धर्मों के खिलाफ अनर्गल बयान देना स्वामी अग्निवेश का पेशा रहा है। हालांकि इस्लाम में किसी भी धर्म के अपमान की सख्त मनाही है। बावजूद ऐसे शख्स को मंच प्रदान करना पार्टी के नेतृत्व और उसके मुस्लिमों के हक की लड़ाई के दावे पर ही सवालिया निशान खड़ा करता है। अब देखना होगा कि SDPI स्वामी अग्निवेश के बयान के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगी या एक मामूली से बयान के साथ रस्म अदायगी करेगी।