अंग्रेजी अखबार The Indian Express के एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। इस दौरान उन्होने मुस्लिमों को बुरे हालात के लिए वोट बैंक की राजनीति को जिम्मेदार बताया।

मोदी से पूछा गया – ‘मुस्लिम समाज के कई लोगों को लगता है कि उन्हें अब अपनी राष्ट्रभक्ति की परीक्षा देनी पड़ती है। चुनावी कवरेज के दौरान हमने उनमें से कई लोगों में एक तरह की हिचकिचाहट देखी। उनकी शिकायत है कि उनकी हिस्सेदारी नहीं है।’

इस सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, ‘यह स्थिति उन लोगों के द्वारा पैदा की गई है जो वोट बैंक की राजनीति करते हैं. उन्हें एक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया और मेनस्ट्रीम में नहीं लाए। वह क्यों नहीं पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपना मानते। यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए। वह सानिया मिर्जा को अपना क्यों नहीं मानते। वह साल 1965 की जंग के हीरो अब्दुल हमीद को अपना क्यों नहीं मानते। यह सवाल उनसे पूछना चाहिए।

उन्होने कहा, क्या यह हमारा काम नहीं है कि हम उन्हें शिक्षित करें? जो एमपी/ एमएलए खुद को सेक्युलर कह रहे हैं क्या उन्होंने किसी मुस्लिम को नेतृत्व दिया है।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष हैं क्या वह पद किसी मुस्लिम को नहीं मिल सकता? वह इसे सुनिश्चित क्यों नहीं करते?’

पीएम ने कहा, ‘जहां तक दलितों/ आदिवासियों का सवाल है, मेरा मानना है कि दलितों/आदिवासियों/मुसलमानों को क्यों अध्यक्ष नहीं बनना चाहिए? राजनीति में सब कुछ क्यों होना चाहिए? पत्रकारिता में मुसलमानों को प्रमुख क्यों नहीं बनाया जा रहा है? आपने ऐसा क्यों रखा है? हम जिम्मेदार हैं? हम अभी आए हैं।’

पीएम मोदी ने कहा कि, ‘हमने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के लिए दूसरे कार्यकाल का अनुरोध किया था। अब्दुल कलाम में क्या गलत था? हमारा मानना था कि उन्हें आम सहमति से एक और कार्यकाल दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।’