भारत में राजनीतिक तौर पर मदरसों को निशाना बनाया जाता है। दक्षिणपंथियों की और से कभी इन मदरसों को रूढ़िवाद से जोड़ दिया जाता है। तो कभी इनके रिश्ते आतंकवाद से जोड़ दिये जाते है। बावजूद देश की कई महान हस्तियों ने अपने जीवन की शुरुआत ही मदरसों से की है।

इसी बीच पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान के मुस्लिम बाहुल इलाके में स्थित अगोरदंगा मदरसा केतुग्राम की तीन हिंदू लड़कियों ने वेस्ट बंगाल हाई मदरसा सेकेंड्री एग्जाम (माध्यमिक बोर्ड) में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं। टेलीग्राफ में छपी खबर के अनुसार पियूपिया शाहा, साथी मोदक और अर्पिता साहा ने 800 अंकों में से 730 (91.25 प्रतिशत),730 और 739 (92.38 प्रतिशत) हासिल किए।

पियूपिया के पिता रामेश्वर कहते हैं कि जब मुस्लिम बच्चे स्कूल जाते हैं जबकि स्कूल मदरसा नहीं है तो फिर हमें अपने बच्चियों को इस्लाम परिचय पढ़ाने में क्यों दिक्कत होनी चाहिए? पियूपिया का कहना है कि उसके साथ टीचर काफी अच्छे से बर्ताव करते थे और उसकी काफी मदद करते थे।

इसके अलावा अर्पिता का कहना है कि वह हिंदू रीति रिवाजों को लेकर पहले से ही काफी अभयस्त है लेकिन वह अन्य धर्म के बारे में भी जानना चाहती है, इस्माल के बारे में जानने से उसे नई चीजें पता चलीं। यह पढ़ाई की बोझ की तरह बिल्कुल नहीं था।पियूपिया और साथी सिविल सर्विसेज करना चाहती हैं जबकि अर्पिता नर्स बनने की हसरत रखती हैं।

बता दें कि केतुग्राम बीरभूम में अजय नदी किनारे स्थित है।यहां 46.77 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है। 2011 की जनगणा के मुताबकि बंगाल की साक्षरता दर 76.26 है और दूर दराज के इस गांव की साक्षरता दर 68 प्रतिशत है। यहां के निवासियों का कहना है कि उनके घर से सेकेंड्री स्कूल 6 किलोमीटर की दूरी पर हैं जिस वजह से वह अपने बच्चों को इतनी दूर पड़ने नहीं भेज पाते हैं।

पश्चिम बंगाल आई मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष अबू कहर कमरुद्दीन का कहना है कि हिंदू छात्रों को मदरसे में पढ़ाना सद्भाव का प्रतीक है।पिछली साल से इस साल हिंदू छात्र-छात्रों के मदरसों में जाने की संख्या में 4 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।