फर्जी सेक्युलरिज़्म को कोसिए मगर ये भी याद रखिए – ‘मुस्लिम सांसदों की जीत सेक्युलरिज़्म की देन’

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ये जो लगभग दो दर्जन मुस्लिम संसद में पहुंचे हैं तो ज़्यादा मत पगलाइये । अपनी क़यादत होनी चाहिए ज़रूर होनी चाहिए मैं भी समर्थन करता हूँ मगर उसमें और का भी समावेश होना चाहिए, दूसरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञयता भी होनी चाहिए । आप फर्जी सेक्युलरिज़्म को कोसिए उसके ख़िलाफ ख़ूब लिखिए, सेक्युलरिज़्म के ठेकेदारों से हिसाब भी मांगिए ये आपका हक़ भी है और दायित्व भी है मगर सेक्युलरिज़्म को मत ख़ारिज कीजिए । क्यूँ कि यह जितने भी सांसद सदन में पहुंचे हैं इनमें ऐसा कोई भी नहीं है जो सिर्फ मुसलमानों के वोट से जीता हो । बाहुबली अफज़ाल अंसारी हों, उवेसी या जलील हों यह भी सिर्फ मुसलमानों के वोट से सांसद नहीं बने हैं, इनके सांसद बनने में ग़ैर मुस्लिमों का भी योगदान है भले ही वह योगदान आंशिक ही क्यूँ न हो । कहने का तात्पर्य ये है कि आप सेक्युलरिज़्म को सिरे से ख़ारिज नहीं कर सकते और आपको करना भी नहीं चाहिए क्यूँ कि आप संघी नहीं हो ।

जिस तरह आप सपा बसपा कांग्रेस आदि के ग़ैर मुस्लिम नेताओं को जिताकर ख़ुदको सेक्युलर समझते हैं उसी तरह जिन महान लोगों ने इस नफरत भरी सुनामी में भी मुसलमानों पर ऐतबार किया उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाकर संसद में भेजा वे भी सेक्युलर हैं आप इससे इनकार नहीं कर सकते । माना कि इन्हें मिलने वाले वोट कंडीडेट को नहीं प्रत्यासी को पड़े होंगे फिर भी यह बहुत बड़ी बात है कि जिस दौर में मुसलमानों से नफरत ही मुख्य चुनावी मुद्दा हो, जिस दौर में हिन्दुव के नाम पर आतंकी भी हीरो बनाया जा रहा है उस दौर लोग अपनी पार्टी के प्रत्यासी के मुसलमान होने के बावजूद उसका समर्थन करते हैं उसे जिताते हैं वे यकीनन महान हैं उनका सम्मान कीजिए । कोई ऐसी बात न कीजिए कि उन्हें उनके अपने ही ताना दें और उन्हें शर्मिंदा होना पडे़ । बल्कि कोशिश ये कीजिए कि उन्हें अपने फैसले पर गर्व हो पछताना न पड़े ।

कहने का तात्पर्य ये है कि जब आप उनकी जीत को अपनी क़यादत की जीत बनाकर पेश करेंगे तो यकीनन उन्हें दुख होगा कि क्यूँ नहीं उन्हों ने भी अपनी क़यादत को चुना । इसलिए हे बिरादरान आपसे पुरख़ुलूस गुजारिश है कि जीत का जश्न सेक्युलरिज़्म तहत मनाइये न कि अपनी क़यादत के तहत । आप अपनी क़यादत को तभी मजबूत कर सकते हैं जब आप मुद्दों की बात करेंगे, जब आप दलितों पिछड़ों, अगड़ों, सर्व साधरण लोगों की, पर्यावरण की, विकास की, देश हित की बात करेंगे ।

बकिया चुनाव नतीज़ों पर लिखने के लिए बहुत कुछ, देश की मानसिकता पर, विपक्ष की हार पर, जीत के कारणों पर, मुद्दों के फेल होने पर बहुत कुछ हैं मगर वक़्त की कमी है इसी लिए नहीं लिख पा रहा हूँ ।

अबरार अहमद की कलम से…

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