श्रीलंका: मुस्लिम मंत्रियों के इस्तीफ़े को लेकर हिन्दू सांसदों का भड़का गुस्सा

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कोलंबो। श्रीलंका के प्रभावी बौद्ध संन्यासी अथुरालिये रतना की भूख हड़ताल को देखते हुए श्रीलंका में सभी नौ मुस्लिम मंत्रियों ने सरकार से इस्तीफ़ा दे दिया है। इसके अलावा दो प्रांतीय गवर्नरों ने भी अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। इन इस्तीफ़ों से साफ़ हो गया है कि बौद्ध बहुल श्रीलंका में ईस्टर के दिन चर्च पर हुए हमले के बाद से सब कुछ ठीक नहीं है।

मंत्रियों का कहना है कि हिंसा में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार रक्षा करने में नाकाम रही है। सोमवार को जिन 9 मंत्रियों और दो प्रांतीय राज्यपालों ने इस्तीफा देने का फैसला किया है। इनमें कैबिनेट मंत्री कबीर हाशिम, गृह मंत्री हलीम और रिशद बतीउद्दीन शामिल हैं। इनके साथ राज्य मंत्री फैजल कासिम, हारेश, अमीर अली शिहाबदीन, सैयद अली जाहिर मौलाना के अलावा डिप्टी मिनिस्टर अब्दुल्ला महरूफ ने भी इस्तीफा देने का फैसला किया।

न्याय और जेल मंत्री रऊफ हकीम के मुताबिक, सभी मंत्री अपने पद से इस्तीफा देंगे, लेकिन सरकार का समर्थन करते रहेंगे। समर्थन भी इस शर्त पर होगा कि सभी अल्पसंख्यकों को समान न्याय मिले और हिंसा की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा मिले। यदि ऐसा नहीं होता, तो फिर मंत्री समर्थन देने के बारे में दोबारा विचार कर सकते हैं।

वहीं अब मुस्लिम मंत्रियों के इस्तीफ़े पर हिन्दू सांसदों और नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है। द तमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) का कहना है कि मुस्लिम मंत्री भेदभाव के शिकार हो रहे हैं। टीएनए के प्रवक्ता और सांसद एम सुमनतिरन ने कहा, आज ये निशाने पर हैं कल हमलोग होंगे और आगे कोई और होगा। आज सभी श्रीलंकाई नागरिकों को साथ रहने की ज़रूरत है। हमलोग मुसलमानों से मिलकर रहेंगे।

तमिल प्रोग्रेसिव अलायंस और श्रीलंका के हिन्दू नेता मनो गणेशण ने कहा है कि अगर सरकार बौद्ध संन्यासियों के हिसाब से चलेगी तो गौतम बुद्ध भी मुल्क को नहीं बचा पाएंगे। गणेशन ने कहा कि मुसलमानों पर कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ है और न ही ये आज तक ऐसी गतिविधि में शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम मंत्रियों को इस्तीफ़े के लिए मजबूर करना गौतम बुद्ध का अपमान है और अगर ऐसा ही रहा तो दुनिया श्रीलंका को बौद्ध देश को रूप में स्वीकार नहीं करेगी।

शहरी विकास, जल एंव आपूर्ति मंत्री रउफ़ हकीम ने कहा, बीते दो दिनों से देश की मुस्लिम आबादी ख़ौफ़ में है। हकीम श्रीलंका की सबसे बड़ी मुस्लिम पार्टी के मुखिया हैं। उन्होंने कहा, हमारे लोग ख़ूनी संघर्ष से डरे हुए हैं।

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