श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने दिया एकता पर ज़ोर, कहा – ‘मुस्लिम प्रभाकरन’ को पैदा होने का मौका ना दें

0
342

कोलंबो. श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने रविवार को देश के ताजा हालात को लेकर आगाह करते हुए एकता और भाईचारे पर ज़ोर दिया। उन्होने चेतावनी दी कि आज के समय में देश बंट रहा है। उन्होंने कहा कि राजनेता और धार्मिक नेता बंट गए हैं। हमें किसी “मुस्लिम प्रभाकरन’ को पैदा होने का मौका नहीं देना चाहिए, वरना एक और जंग शुरू हो जाएगी।

कोलंबो गजट की खबर के अनुसार, राष्ट्रपति ने जनता से ‘‘मुस्लिम प्रभाकरण के सिर उठाने के लिए कोई भी गुंजाइश ना छोड़ने का अनुरोध किया। उन्होंने आगाह किया, ‘‘अगर हम विभाजित और अलग हो जाते हैं तो पूरा देश हार जाएगा। एक और युद्ध शुरू हो जाएगा।’’

बता दें कि श्रीलंका में ईस्टर के दिन स्थानीय इस्लामिक स्टेट के सिलेसिलेवार धमाकों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे।  इन आत्मघाती हमलों में तीन चर्चों और तीन लग्जरी होटलों को निशाना बनाया गया था इसके बाद से ही श्रीलंका में तनाव बना हुआ है साथ ही वहां मुस्लिम समुदाय पर हमले भी हो रहे हैं।

इस संबोधन में सिरिसेना कई नेताओं पर भी बरसे। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि ज्यादातर राजनेताओं का फोकस इस साल के आखिर में चुनाव पर केंद्रित है, देश पर नहीं। उन्होंने कहा कि विभाजन देश को आगे बढ़ने से रोक रहा है।राष्ट्रपति ने कहा कि वह तमिलों द्वारा झेली जा रही मुश्किलें समझते हैं और उनमें से कुछ का समाधान निकालेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अतीत को अलग रखकर सबको एकजुट होकर देश को आगे ले जाना चाहिए।

1976 में लिट्टे की स्थापना वेलुपिल्लई प्रभाकरन ने की थी। श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल राज्य की स्थापना के लिए करीब 25 साल तक लिट्टे और सरकार के बीच संघर्ष हुआ। इस दौरान हजारों लोगों की जान गई। 2009 में श्रीलंकाई सेना ने प्रभाकरन का खात्मा किया था।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें