दिल्ली वक्फ बोर्ड का तबरेज की बीवी को मुआवजा और नौकरी देने का ऐलान

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दिल्ली वक्फ बोर्ड ने झारखंड के कोल्हान प्रमंडल क्षेत्र में कथित चोरी के आरोप में पिटाई के बाद मारे गए 24 साल के तबरेज़ अंसारी की विधवा शाइस्ता अंसारी को नौकरी और मुआवजा देने की घोषणा की है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने बताया कि आज तबरेज की पत्नी को 5 लाख रुपये का चेक और जॉब का ऑफर लेटर दिया जाएगा। इसके अलावा तबरेज की कानूनी लड़ाई में वक्फ बोर्ड मदद करेगा।

बता दें कि 17 जून की रात में खरसावां के क़दमडीहा निवासी तबरेज़ को कुछ लोगों ने खंभे में बांधकर बेदर्दी से पीटा थे। इस दौरान उससे नाम पूछ कर ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के नारे भी लगवाए गए।  तबरेज के पत्नी शाइस्ता परवीन ने पुलिस को अपनी शिकातय में कहा है कि 17 जून को उसके पति जमशेदपुर जा रहे थे, उसी दौरान धातकीडीह गांव में पप्पू मंडल और उनके लोगों ने उनके साथ मारपीट की।

तबरेज के पत्नी का कहना है कि उनलोगों ने रात भर उनके पति को बिजली के खंंभे में बांधकर रखा गया। इस दौरान उनसे जबरन जय श्री राम और जय हनुमान का नारा भी लगवाया गया। शाइस्ता परवीन ने शिकायत में कहा कि रातभर मारपीट किए जाने के बाद सुबह उनके पति को सरायकेला जेल भेज दिया गया। तबरेज़ की शादी इसी साल 27 अप्रैल को हुई थी। वहीं तबरेज के परिजनों के मुताबिक मारपीट के दौरान तबरेज को धतूरे का जहरीला रस पिलाया गया था। जिससे उसकी मौत हो गई।

मामले में सबसे पहले गिरफ्तारी मुख्य आरोपी पप्पू मंडल की हुई। वहीं बाद में पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही मामले में दो पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया। ये पूरा मामला अब अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुँच चुका है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने इस हत्याकांड की बुधवार को कड़ी निंदा की और सरकार से इस तरह की हिंसा और भय के माहौल को रोकने के लिये ठोस कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के अध्यक्ष टोनी पर्किन्स ने कहा, ‘हम इस नृशंस हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं जिसमें अपराधियों ने कथित तौर पर अंसारी की घंटों पिटाई करते हुए उसे हिंदूवादी नारे लगाने के लिए मजबूर किया।’

टोनी ने कहा, ‘हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह अंसारी की हत्या की व्यापक जांच के साथ ही इस मामले को देख रही स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी जांच कर ठोस कदम उठाए जिससे इस तरह की हिंसा और भय के माहौल को रोका जा सके।’

उन्होंने कहा, ‘जवाबदेही का अभाव केवल उन लोगों को प्रोत्साहित करेगा जो मानते हैं कि वे धार्मिक अल्पसंख्यकों को दंडित करने के लिये उन्हें निशाना बना सकते हैं। इससे पहले आयोग ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में कहा था कि भारत में गोहत्या के नाम पर हिंसक हिंदू चरमपंथी समूहों द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से मुसलमानों, के खिलाफ हमला साल 2018 में भी जारी रहा।

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