बरसों पहले तबरेज के पिता की भी मॉब लिंचिंग में गई थी जान

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झारखंड के सरायकेला खरसावां में भीड़ की हिंसा का शिकार हुए तबरेज अंसारी के पिता मस्कूर अंसारी भी करीब 15 वर्ष पहले इसी तरह मारे गए थे। मसकूर अंसारी की भी चोरी के आरोप में वर्ष 2012 में मॉब लिंचिंग के दौरान हत्‍या हुई थी। यह घटना जमशेदपुर के बागबेड़ा में हुई थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक कांग्रेस जिला इकाई के महासचिव मोहसिन खान ने अखबार को बताया कि वो मस्कूर अंसारी का शव लेने के लिए जमशेदपुर गए थे। उनका कहना था कि आखिरकार वो यहां से था। करीब सत्तर वर्ष की उम्र के दो बुजुर्गों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया (क्योंकि नाम सामने आने पर जांच एजेंसी उनसे भी पूछताछ करेंगी) कि खान ने जो कहा है वो सही है। उन्होंने कहा कि मस्कूर को वास्तव में भीड़ द्वारा मारा गया था।

वहीं तबेरज के घर से करीब 100 मीटर की दूरी पर रहने वाली एक बुजुर्ग महिला ने कहा, ‘वह भी भीड़ द्वारा पकड़ा गया था। उसकी खूब पिटाई की गई और बाद में गला रेत दिया गया। जब उसका शव लाया गया तब हम यहीं मौजूद थे।’ स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध कुमार झा ने कहा कि एक दिन बागबेड़ा के रामनगर इलाके के निवासियों को उसे पकड़ कर मार डाला।

बता दें कि 17 जून की रात में खरसावां के क़दमडीहा निवासी तबरेज़ को कुछ लोगों ने खंभे में बांधकर बेदर्दी से पीटा थे। इस दौरान उससे नाम पूछ कर ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के नारे भी लगवाए गए। तबरेज के पत्नी शाइस्ता परवीन ने पुलिस को अपनी शिकातय में कहा है कि 17 जून को उसके पति जमशेदपुर जा रहे थे, उसी दौरान धातकीडीह गांव में पप्पू मंडल और उनके लोगों ने उनके साथ मारपीट की।

तबरेज के पत्नी का कहना है कि उनलोगों ने रात भर उनके पति को बिजली के खंंभे में बांधकर रखा गया। इस दौरान उनसे जबरन जय श्री राम और जय हनुमान का नारा भी लगवाया गया। शाइस्ता परवीन ने शिकायत मेंकहा कि रातभर मारपीट किए जाने के बाद सुबह उनके पति को सरायकेला जेल भेज दिया गया। तबरेज़ की शादी इसी साल 27 अप्रैल को हुई थी।

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