देश बचाओ, दस्तूर बचाओ सम्मेलन में बोले उस्मानी – हर हाल में देश का मुसलमान संविधान बचाएगा

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बीकानेर। देश में साम्प्रदायिक माहौल बनाकर असली मुद्दों को छिपाया जा रहा है। यह लोगों की रोज़ी रोटी पर हमला है और अपने ही देश में इसके नागरिकों को विदेशी घोषित करने की साजिश को समझना होगा। आज देश में मुसलमानों, दलित और जनजातियों के सामने बड़ा संकट है। यह बात यहाँ के पीएमवी पैलेस में आयोजित ‘देश बचाओ- दस्तूर (संविधान) बचाओ’ कॉन्फ्रेंस में उभरकर सामने आई। समागम के आयोजक तहरीक उलामा ए हिन्द ने जयपुर में 21 जुलाई के कामयाब कार्यक्रम के बाद बीकानेर में इस सभा का आयोजन किया। तहरीक उलामा ए हिन्द के बैनर तले आयोजित समारोह में वक्ताओं ने देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, दलित और जनजातियों पर हिन्दूवादी ताकतों के हमले की निन्दा करते हुए एक ज्ञापन भी तैयार किया गया जिसे बाद में भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम पर रवाना किया गया।

हर हाल में देश का मुसलमान संविधान बचाएगा – यासीन उस्मानी

उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के पूर्व सदस्य डॉ. यासीन अली उस्मानी ने कहाकि जिन लोगों ने आज़ादी की लड़ाई में एक बून्द ख़ून नहीं बहाया, वह आज सत्ता में हैं। आज यह समय आ गया है कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकरजी के संविधान को बचाया जाए। बीकानेर से उठी यह आवाज़ बहुत आगे जाएगी। हमारा संबंध संविधान से है और इसकी सुरक्षा हमारे लिए बहुत महत्व रखता है। जब भी कोई व्यक्ति संविधान को नष्ट करने की कोशिश करेंगे, देश का मुसलमान अपना कर्तव्य निभाते हुए इसकी सुरक्षा करेगा। उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आंदोलन का ज़िक्र किया जिसमें दो करोड़ 80 लाख महिलाओं ने लिखित में मांग की थी कि वह किसी कानून के पक्ष में नहीं लेकिन उन महिलाओं की मांग को अनसुना कर दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अभिमान का आरोप लगाते हुए कहाकि वह एकतरफा निर्णय ले रहे हैं। उस्मानी ने कहाकि मुसलमानों की देश के लिए क़ुर्बानी दी। मुसलमानों ने मज़दूरी की, भूखे-प्यासे रहे लेकिन अपनी भारतीय नागरिकता पर इतराते रहे। उन्होंने कहाकि साम्प्रदायिकता, बेरोज़गारी, दलित उत्पीड़न से मुक्ति के लिए देश का मुसलमान संघर्ष करता रहेगा।

भारत में इटली-जर्मनी दोहराया जा रहा – खैरनार

कार्यक्रम में नागपुर से आए सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्र सेवा दल के प्रमुख सुरैश ख़ैरनार ने द हिन्दू की अंग्रेज़ी पत्रिका फ्रंटलाइन को दिखाते हुए पत्रकार एवं वकील एजी नूरानी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रकाशित आलेख का जिक्र किया। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता मुंजे ने इटली में तानाशाह मुसोलिनी से 1925 में मुलाक़ात की थी और उसी साल भारत में आरएसएस की स्थापना की गई। उन्होंने कहाकि नरेन्द्र मोदी आरएसएस की 100 साल की मेहनत का फल है। आज भारत में इटली और जर्मनी दोहराया जा रहा है। खैरनार ने कहाकि अनुच्छेद 370, तीन तलाक और राम मंदिर के नाम पर लोगों को भरमा कर आम जनता की रोज़ी रोटी को समाप्त करने की साज़िश की जा रही है। उन्होंने कहाकि भारतीय जनता पार्टी मुसलमानों को डराकर हिन्दुओं के ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का जिक्र करते हुए इसे ग़ैर मानवीय बताया। खैरनार ने कहाकि गाय वध का धंधा करने वाली कम्पनी अलकबीर का मालिक मुसलमान नहीं है। उन्होंने जस्टिस लोया की मौत पर अफसोस जताते हुए इसे न्याय की हत्या बताया।

संविधान पढ़ो और तोहफे में दो – ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही

तहरीक उलामा ए हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष खालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहाकि मुसलमानों और दलितों को निजी मुद्दों की बजाय समाजी मुद्दों पर एकता का प्रदर्शन होना चाहिए। मिस्बाही ने कहाकि आज़ादी के समय भारत के मुसलमानों ने भारत में ही रहने का ही निश्चय किया क्योंकि उसे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकरजी के संविधान में आस्था थी। उन्होंने कहाकि हम एक नई परम्परा की शुरूआत करें और अपने तोहफे में संविधान की कॉपी का लेन देन शुरू करें। मिस्बाही ने शिक्षा का स्तर उठाने की अपील करते हुए मश्विरा दिया कि शिक्षा के स्तर में सुधारकर ही हम परिस्थिति बदल सकते हैं। उन्होंने देश की कानून व्यवस्था की बदहाली का जिक्र करते हुए लोगों से अपील की कि वह रोज़गार, श्रम, सामाजिक बराबरी और कानून व्यवस्था की बहाली पर विचार करे। उन्होंने समाज में पिछड़ेपन के लिए अशिक्षा को वजह बताया। समय के सदुपयोग का आह्वान करते हुए उन्होंने कहाकि हम बच्चों के समयावधि पर नज़र रखें और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करें।

मुसलमानों का ख़ून आज़ादी में शामिल- हफ़ीज़ुर्रहमान

दिल्ली से आए प्रोफेसर डॉक्टर हफ़ीज़ुर्रहमान ने कहाकि जहाँ भी अत्याचार हो रहा हो, उसका विरोध करना हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने इस्लामी इतिहास का हवाला देते हुए कहाकि अबु जहल, यज़ीद, हलाकू और चंगेज़ खाँ और ब्रिटिश अंग्रेज़ों तक का अत्याचार देखा है लेकिन हमने हर सतह पर अत्याचार का विरोध किया है। उन्होंने आज़ादी के संघर्ष को याद करते हुए कहाकि मौलाना मुहम्मद अली जौहर, मौलाना फ़ज़ले हक़ ख़ैराबादी और बहादुर शाह ज़फ़र को आज़ादी का आदर्श बताया। उन्होंने संविधान, मीडिया, सुरक्षा और सौहार्द को बचाने के लिए लोगों को साथ आने की अपील की। उन्होंने भारत के विविध स्वरूप को याद करते हुए कहाकि भारत एक देश नहीं, एक प्रायद्वीप है। इतनी संस्कृतियों, धर्मों और विचारों को बचाने के लिए हमें हिंसा नहीं वैचारिक स्वतंत्रता का उपयोग करते हुए समाज में संवाद को स्थापित करना है। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के भारत में रुकने के निर्णय को भारत की आत्मा के बल से जोड़ते हुए कहाकि देश के बंटवारे में हमने पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत में रुकने का फैसला किया क्योंकि भारत के मुसलमान को महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर पर यक़ीन था। उन्होंने कश्मीर के विकास के नाम पर अनुच्छेद 370 हटाए जाने का स्वागत करते हुए केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार से अपील की कि देश में अनुच्छेद 371 के दायरे में आने वाले राज्यों का भी विशेष दर्जा समाप्त करके उन राज्यों का भी विकास करना चाहिए।

दलित आंदोलन को हमेशा मुसलमानों ने शक्ति दी – सोहन द्रविड़

भीम आर्मी के बीकानेर ज़िला अध्यक्ष आज़ाद सोहन द्रविड़ ने संविधान और मूलनिवासियों की जयजयकार करते हुए अपने संबोधन में कहाकि बाबा साहेब के प्रयासों को मुसलमानों के प्रयासों से बल मिला है। उन्होंने कहाकि सावित्री बाई फूले ने दलितों और वंचितों के शैक्षणिक अधिकारों के लिए अपने संघर्ष में फातिमा बीबी ने साथ दिया, उसी के बल पर हमारा समाज प्रगति कर पाया। उन्होंने टीपू सुल्तान के दलित और ट्राइबल महिलाओं के सम्मान और बाबा साहेब के संविधान सभा के लिए मुस्लिम बहुल सीट से जीतने को याद करते हुए दलित-ट्राइबल-मुस्लिम एकता का ज़िक्र करते हुए इस एकता को और बढ़ाने पर बल दिया।

तीन तलाक़ एक राजनीतिक प्रपंच – मदन गोपाल जैन

समाजसेवी मदन गोपाल जैन ने कहाकि समस्याओं की पहचान करना आवश्यक है। इसी के आधार पर हम शिक्षा, समाज, राजनीतिक एवं अन्य समस्याओं का बेहतर हल कर पाएंगे। उन्होंने तीन तलाक़ का ज़िक्र करते हुए इसे राजनीतिक प्रपंच बताया। उन्होंने कहाकि तीन तलाक़ पर लाए गए क़ानून के बल पर ध्रुवीकरण करके राजनीतिक लाभ लेना ही इस सरकार का उद्देश्य है। उन्होंने विधवा विवाह पर भी सामाजिक न्याय करने का आह्वान किया।

बच्चे हमारे भविष्य के संरक्षक हैं – हाफ़िज़ अशरफ़

तहरीक उलामा ए हिन्द के संयुक्त सचिव हाफ़िज़ मुहम्मद अशरफ ने कहाकि हमें बच्चों के भविष्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हमारे समाज की समस्या यह है कि हम बच्चों से संवाद नहीं कर रहे हैं। हम सरकार से तो बेहतर समाज की कल्पना कर रहे हैं लेकिन हम अपने बच्चों को बेहतर परवरिश नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने बच्चों के शैक्षणिक अधिकारों की वकालत करते हुए उन्हें बेहतर भविष्य का आधार बताया।

वैकल्पिक मीडिया की ओर रुख़ करें – उस्मानी

पत्रकार अख़लाक उस्मानी ने कहाकि अगर मुस्लिम, दलित, जनजातीय और पिछड़े वर्गों को लगता है कि मीडिया में उनकी बात को नहीं सुना जा रहा है तो उन्हें वैकल्पिक मीडिया पर कार्य करना चाहिए। इस मौक़े पर उन्होंने कहाकि वह डिजिटल मीडिया का प्रशिक्षण देने को तैयार हैं। उन्होंने मुसलमानों को आर्थिक और क़ानूनी पढ़ाई पर टैलेंट पूल तैयार करने का आह्वान किया। उस्मानी ने कहाकि विधायी और वित्तीय शिक्षा के बिना मुसलमानों और दलितों की ज़मीनी परिस्थिति नहीं बदलेगी।

इस अवसर पर कतरियासर (बीकानेर) के पूर्व सरपंच प्रतिनिधि और जाट नेता ओमप्रकाश चौधरी ने कहाकि संविधान बचाने की आवश्यकता है। आज देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। लेकिन हमारी जिम्मेदारी है कि हमें संविधान को बचाना होगा। शहर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष हाज़ी मक़सूद अहमद ने सभा को संबोधित करते हुए कहाकि मुस्लिम समाज में जागरुकता आ रही है। यह प्रसन्नता की बात है कि देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को संजोने के लिए यह प्रयास राजस्थान से शुरू हुआ है। उन्होंने कहाकि यदि मुसलमान कहीं भी चैन की सांस ले रहे हैं तो वह बाबा साहेब भीमराव अंबेडकरजी के दिए हुए संविधान का प्रताप है।
दलित नेता विनोद जावा ने कहाकि अगर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकरजी को मुसलमानों ने अपना नेता बनाकर संविधान सभा में भेजा था। उसी दिन तय हो गया था कि अब दलित को अपनी पीठ पर झाड़ू बाँधकर नहीं चलना पड़ेगा। उन्होंने कहाकि भारत का दलित मुसलमान के साथ संविधान बचाने के लिए साथ खड़ा है। देश के 30 करोड़ दलित भारत के मुसलमानों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कांग्रेस के नेता ग़ुलाम मुस्तफा ने कहाकि दलित, मुस्लिम, अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच सौहार्द होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि दलितों के साथ मुसलमानों के ऐतिहासिक संबंध हैं और इन दोनों समाजों के बीच तनाव पैदा करने वाले तत्वों की पहचान करना आवश्यक है।  आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष पीर रफ़ीक़ शाह ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक मुमताज़ अहमद नईमी, सचिव जमील अहमद, मीडिया प्रभारी हाफ़िज़ मुनीर अहमद, हाफ़िज़ नौशाद, अकरम उस्मानी, यूडी भाई, ग़ुलाम मुस्तफ़ा, सुमित कोचर आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
ज्ञापन में सात बिन्दु

भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए ज्ञापन में छह प्रमुख बिन्दुओं पर ज़ोर दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि बीकानेर में मुस्लिम महिला कॉलेज की स्थापना समाज की नितांत आवश्यकता है। इस ज्ञापन में गाय के नाम पर आम मुसलमानों, दलित और ट्राइबल की हत्या रोकने के लिए हमलावरों पर तत्काल मुक़दमा क़ायम होना चाहिए। इसमें राजस्थान में पहलू ख़ान की हत्या का ज़िक्र करते हुए पुलिस के रवैये की आलोचना की गई और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई। दलितों और जनजातियों पर साज़िशन हमलों की आलोचना करते हुए भारत और राजस्थान के अनुसूचित जाति- जनजाति और अल्पसंख्यक आयोग को न्यायिक शक्तियाँ देने और मुक़दमा क़ायम करने और निर्णय देने के अधिकार की मांग की गई। इसके अलावा ज्ञापन में स्कूली और उच्च शिक्षा में संविधान के अध्ययन को अनिवार्य करने की मांग की गई। तहरीक उलामा ए हिन्द का विचार है कि संविधान के अनिवार्य अध्ययन के बाद युवाओं के राजनीतिक विचारों का शुद्धिकरण होगा और उसका अल्पसंख्यक, दलित और जनजातियों एवं महिलाओं के प्रति विचारों में संवेदनशीलता का विकास होगा। मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना, उर्दू टीचर की भर्ती और जेलों में बंद विचाराधीन ग़रीब मुस्लिम क़ैदियों की ज़मानत भरने के लिए राजस्थान सरकार कार्य करे।

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