CAA के विरोध में दरगाह आला हजरत – ‘यह देश सविधान से चलेगा, तानाशाही से नहीं’

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मुसलमानों का सुन्नी मरकज़ दरगाह आला हज़रत की ओर से काज़ी-ए-हिन्दुस्तान जानशीन ताजुशारिया मुफ्ती मोहम्मद असजद रज़ा खाँ कादरी ने नागरिकता संशोधन बिल पास होने पर कड़ी निंदा जताते हुए कहा केंद्र सरकार ने एक बार फिर लोकसभा में “नागरिकता संशोधन विधेयक” पारित किया है। पास होने के बाद यह बिल विधेयक अब राज्यसभा में पेश किया गया। जहा उससे पास कर दिया गया। यह बिल मौलिक अधिकारों के अनुच्छेद (14) (कानून के अनुसार समानता का अधिकार) और अनुच्छेद (15) (सरकार धर्म, जाति, लिंग, भाषा और क्षेत्र के आधार पर नागरिकों को भेदभाव नहीं करेगी) का घोर उल्लंघन करता है।

विधेयक की हिमायत और धार्मिक भेदभाव का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा था। हमारे तीन मुस्लिम पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान) में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों को सताया जा रहा है, इसलिए हम उन्हें भारत की नागरिकता देना चाहते हैं। मुसलमानों के लिए कई इस्लामिक देश हैं। हिंदुओं का तो एकमात्र देश हैं। तो वे कहां जाएंगे?

यह सोचकर, केवल गैर-मुस्लिम इस बिल में शामिल हैं। देश का सविधान जो है देश के कानून बनाने वालो के ऊपर है।येह मसला हिन्दु-मुस्लिम का नही देश के सविधान का मामला है। कोन सी सरहद मिलती है अफगानिस्तान से ?कोई सरहद नही मिलती है। अगर पाकिस्तान बांग्लादेश अफगानिस्तान theocratic हैं इस्लामिक देश हैं ? तो श्रीलंका का कानून कया केहता है ? वोह तमिल आप सब से नागरिकता मांग रहे हैं ? उनको नगरिकता क्यों नहीं ?हर जगा पुलिस की जुल्म और ज़ादती बहुत गलत है। येह देश सविधान से चलेगा तानाशाही से नही चलेगा। यह देश तो 1949 से सविधान से चल रहा है।

जो लोग एनआरसी और केब का विरोध कर रहे है। वह काबिल ए तारीफ है। शांति से विरोध करना येह हमारा हक़ है। इसकी इजाज़त अनुच्छेद (19) हमे देता है। और विरोधियों को भी येह आवाज़ सुनना चाहिए। सिर्फ वोट बैंक के समय ही बोलेंगे ? और एनआरसी पर येह मेरी राये है। देश की जनता को एनआरसी का बायकाट करना चाहिए । यह कानून हर जाति और धर्म के लिए नुक्सान दायक है। बहुत जल्द सुन्नी मरकज़ में देश भर के उलमा-ए-इकराम की बैठक होगी और उसमे मशवारा किया जाएगा।

गृह मंत्री के शब्दों से ऐसा लगता है कि दुनिया भर के हिंदू नागरिकता के लिए प्रयास कर रहे हैं और भारत के अलावा कोई भी देश उन्हें नागरिकता देने के लिए तैयार नहीं है। भले ही वे इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि कई देशों ने अपनी सहानुभूति से पहले ही हिंदुओं को नागरिकता दे दी है। उन्हें याद रखना चाहिए कि अगर उसी तरह की नागरिकता का पैमाना अन्य देशों द्वारा अपनाया जाता है, तो सबसे बड़ा नुकसान भारत को होगा। क्योंकि दुनिया में अन्य देशों के नागरिकों की सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिक हैं।

विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 1 करोड़ 75 लाख भारतीय अन्य देशों के नागरिक हैं। यदि वे देश भी धर्म को नागरिकता का पैमाना बनाते हैं, तो पौने 2 करोड़ भारतीय तबाह हो जाएंगे। इसलिए, सिर्फ मुस्लिम शत्रुता की भावना और वोट बैंक के लिए देश की अखंडता और लाखों भारतीयों को दांव पर लगाने से देश नष्ट हो रहा है। अगर सरकार वास्तव में मजलूमों के प्रति सहानुभूति रखती है तो बर्मा, श्रीलंका और नेपाल को इस सूची में शामिल कयो नही किया गया?

वही मुफ्ती असजद मिया ने येह भी कहा भाजपा के बिल को देशहीत से परे बताया है। साथ ही कहा है कि ग्रहमंत्री दारा संसद में बोले गये घुसपैठिया शब्द को भी शर्मसार बताया है। बार बार मुसलमानों को दबाने की कोशिश की जाती है। अब नागरिकता संशोधन बिल पास कर के। येह बिल सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम विरोधी है। हम इस नागरिकता संशोधन कानून बिल की बरेली सुन्नी मरकज़ से सख्त मुखालफत करते है। येह बिल सविंधान के खिलाफ़ बताया। हम मुसलमान अमन पसंद के लोग है। हमेशा अमन पसंद ही चाह। येह सरकार हिन्दुस्तान मे अमन चैन नही चाहती। डर का मोहोल पैदा कर रही है। ऐसे बिल से देश के हालात बिगड़ रहें है। बिल पर नाराज़गी जताते हुए, देश में चल रहें हालातों पर भी चिंता ।”