सीएए-एनआरसी के विरो’ध में शाहीन बाग में जारी प्र’दर्शन की ओर स्पष्ट इशारा करते हुए केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि आम जीवन में व्यवधान उत्पन्न कर अपना विचार दूसरों पर थोप देना भी आतं’कवाद का एक रूप है. भारतीय छात्र संसद को संबोधित करते हुए खान ने कहा, ‘आक्रा’मकता केवल हिं’सा से सामने नहीं आती है. यह कई रूपों में सामने आती है. यदि आप मेरी नहीं सुनोगे तो मैं सामान्य जीवन बाधित कर दूंगा. असहमति लोकतंत्र का मूल तत्व है. इसे लेकर कोई समस्या नहीं है, लेकिन विज्ञान भवन के बाहर पांच लोग धर’ना देने लगें और कहें कि जब तक यह छात्र संसद उनकी मर्जी का प्रस्ताव पारित नहीं करती तब तक वे नहीं हटेंगे तो वह आतं’कवाद का एक दूसरा रूप है.’

सीएए वि’रोधी प्र’दर्शनका’रियों से संविधान की प्रस्तावना पढ़ने की ओर इशारा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि खुशी है कि लोग संविधान की प्रस्तावना पढ़ने लगे हैं. चीजों का घालमेल नहीं करें. अभिव्यक्ति के नाम पर अपना विचार दूसरों पर नहीं थोपें. उन्‍होंने आगे कहा कि जम्‍मू-कश्‍मीर से अनु’च्‍छेद 370 को निर’स्त करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अनुच्‍छेद 370 में कुछ भी नहीं बचा है. बस इसके बारे में थोड़ा पढ़ें, लेकिन जब घर खाली होता है, वहां कोई जिंदा नहीं रह सकता है. ऐसे घर में बहुत भूतों का वास होता है. इस तरह से आतं’कवाद का भूत सामने आया है. केरल के राज्‍यपाल ने कहा कि अनुच्‍छेद 370 को निर’स्त कर दिया गया है. मैं यहां से कोई बड़ा दावा नहीं करना चाहता. लेकिन जिस तरह से चीजें सामान्य हो रही हैं (कश्मीर में), मुझे इस बात का संदेह नहीं है कि हम आतं’कवाद को काफी हद तक खत्म कर पाएंगे.