मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से लगातार उठापटक जारी है. ये उठापटक क्या तख्तापलट करने वाली है, आज उसकी तस्वीर साफ़ होती नज़र आ रही है. सुप्रीम को’र्ट के फ्लोर टेस्ट कराने के आदेश से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने आज शाम पांच बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया है. कमलनाथ ने कहा कि 15 महीने में मैंने और मेरी सरकार ने जिस तरह से काम किया, उसे यहां की जनता ने देखा. हमारे ऊपर कोई भी आ’रोप नहीं लगा सकता है. उन्होंने कहा कि धो’खा करने वालों को जनता कभी माफ़ नहीं करेगी.

राज्यपाल को लिखे त्यागपत्र में कमलनाथ ने कहा  ‘मैंने अपने 40 साल के सार्वजनिक जीवन में हमेशा से शुचिता की राजनीति की है और प्रजातांत्रिक मूल्यों को सदैव तरजीह दिया है. मध्य प्रदेश में पिछले दो हफ्ते में जो कुछ भी हुआ, वह प्रजातांत्रिक मूल्यों के अवमूल्यन का एक नया अध्याय है.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद से अपना त्यागपत्र दे रहा हूं. साथ ही नए बनने वाले मुख्यमंत्री को मेरी शुभकामनाएं. मध्य प्रदेश के विकास में उन्हें मेरा सहयोग सदैव रहेगा.’

सुप्रीम को’र्ट ने मध्य प्रदेश पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कमलनाथ सरकार को आज शाम पांच बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था. इसके बाद अब कमलनाथ सरकार को शुक्रवार शाम पांच बजे तक किसी भी हाल में फ्लोर टेस्ट करना होगा. इससे पहले, सुप्रीम को’र्ट ने गुरूवार को अपने आदेश में कहा कि अगर बागी विधायक फ्लोर टेस्ट के लिए विधानसभा आने चाहते हैं तो कर्नाटक और मध्य प्रदेश के डीजीपी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराए. साथ ही, सुप्रीम को’र्ट ने पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने को भी कहा है. को’र्ट ने आगे कहा कि सुप्रीम को’र्ट ने आदेश दिया कि विधानसभा का एकमात्र एजेंडा बहुमत साबित करने का होगा और किसी के लिए भी बाधा उत्पन्न नहीं की जानी चाहिए.

बता दें कि इससे पहले, मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने पहले कमलनाथ सरकार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने को कहा था. हालांकि, इसके बाद कोरोना वायरस का हवाला देते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी थी. लेकिन, सुप्रीम को’र्ट ने स्पीकर के इस फैसले को पलटते हुए शुक्रवार को 5 बजे तक फ्लोट टेस्ट कराने का आदेश दिया है.