कोरोनावायरस का असर तमाम खेलों पर भी पड़ा है. आईपीएल और ओलिंपिक खेल अगले साल तक के लिए टल गये हैं. अब कोरोना वायरस का असर स्पेनिश फुटबॉल लीग ला लिगा पर भी पड़ा है. 12 मार्च से ही लीग के मुकाबले नहीं हो रहे हैं. ऐसे में आर्थिक संकट से जूझ रहे क्लब की मदद के लिए कप्तान लियोनल मेसी आगे आए हैं. उन्होंने ऐलान किया है कि खिलाड़ी अपनी सैलरी में 70 फीसदी की कटौती करेंगे. इससे क्लब के कर्मचारियों और बाकी स्टाफ को पूरी तनख्वाह देने में आसानी होगी. मेसी खुद अपनी सैलरी में से 360 करोड़ रुपए कम लेंगे. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सोमवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि हमारी तरफ से अब यह घोषणा करने का वक्त आ गया है कि इस आपात स्थिति से निपटने के लिए हम अपनी 70 फीसदी सैलरी कटवाएंगे. इसके अलावा हम जरूरी योगदान भी देंगे, ताकि क्लब के कर्मचारियों को पूरी सैलरी मिल सके. बार्सिलोना के कप्तान को सालाना सैलरी और बोनस मिलाकर करीब 648 करोड़ रुपए मिलते हैं.

इस फुटबॉलर ने क्लब के कुछ सदस्यों को आड़े हाथों लेते हुए कहा- हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमेशा से ही हमारी यह मंशा रही है कि संकट की घड़ी में कम सैलरी लें. जब भी क्लब को जरूरत पड़ी है, हम सबसे पहले आगे आए हैं. कई बार हमने जरूरत समझते हुए खुद ही मदद की पहल की है. इसलिए हम इस बात पर हैरान नहीं हैं कि क्लब के भीतर से ही कुछ लोग इस बात के लिए हम पर दबाव बना रहे थे, जो हम पहले से ही करना चाहते थे. कुछ समय बाद ही साथी खिलाड़ियों ने मेसी का यह मैसेज अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर कर लिया. इनमें गेरार्ड पीके, स्ट्राइकर एंटोनी ग्रिजमैन, लुईस सुआरेज, जॉर्डी एल्बा शामिल हैं.

पिछले कुछ महीनों से खिलाड़ियों और क्लब के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं. मेसी ने फरवरी में ही सार्वजनिक रूप से क्लब के टेक्निकल सेक्रेटरी एरिक एबिडल की आलो’चना की थी. हालांकि, क्लब के प्रेसिडेंट जोसेप मारिया ने सैलरी कट के मुद्दे पर कहा कि सीनियर खिलाड़ियों को शुरू से ही इसके बारे में पता था. उन्होंने कहा कि मैं शुरू से ही यह चाहता था कि इसे खिलाड़ियों पर थोपने की बजाए रजामंदी से लागू किया जाए, जबकि मैं क्लब के नियमों के मुताबिक इसे (सैलरी कट) सीधे लागू कर सकता था. क्योंकि यह क्लब के लिए अच्छा होता और इससे कोरोना के खि’लाफ जंग को लेकर उसकी प्रतिबद्धता साबित होती.

बार्सिलोना के अलावा एटलेटिको मैड्रिड और एस्पेनियोल जैसे क्लब भी कर्मचारियों की सैलरी कम करने का फैसला कर चुके हैं. वहीं, इसका असर इटली की फुटबॉल लीग सीरी-ए पर भी पड़ा है. युवेंटस ने एक दिन पहले ही सैलरी कम करने का ऐलान किया था. क्लब ने कहा था कि उसकी इस मुद्दे पर कोच और खिलाड़ियों से बात हो चुकी है. क्लब को उम्मीद है कि मार्च से जून के बीच 4 महीने तक मुआवजे को कम करके वह करीब 720 करोड़ बचा लेगा. लेकिन क्लब ने साफ कर दिया कि अगर सीरीज-ए दोबारा शुरू हो जाती है तो खिलाड़ियों को सैलरी का भुगतान होगा.