इरफ़ान खान की हर फिल्म देखने 30 किलोमीटर दूर जाते थे लोग, अब इलाके का नाम बदल कर दी श्रद्धांजलि

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किसी अभिनेता ने अपनी जिंदगी में क्या कमाया, ये उसकी दौलत से नहीं, लोगों के दिलों में उसके लिए प्यार से तय होता है. इरफ़ान खान एक ऐसे ही शानदार अभिनेता रहे जिन्होंने अपने फैन्स ही नहीं, अपने आलोचकों के दिलों पर भी राज किया. आज भले ही इरफ़ान इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वे लोगों के दिल में हमेशा जिंदा रहेंगे. हर किरदार को सच बना देने वाले इरफ़ान खान अभिनय ही नहीं, असल जिंदगी के भी हीरो रहे. एक छोटी से खबर, जिसे ज्यादा जगह भी नहीं मिली, उसकी गहराई में जाइए और देखिये की आखिर ऐसा क्या खास था इरफ़ान में जो अपने चाहनेवालों की जान हैं वो.

महाराष्ट्र का एक छोटा सा इलाका, इगतपुरी. यहाँ त्रिंगलवाड़ी किले की तलहटी से घिरे दर्जन भर गाँवों के आसपास कई किलोमीटर तक कोई सिनेमा हॉल नहीं है, लेकिन यहां रहने वाला हर परिवार स्वर्गीय अभिनेता इरफान को जानता है. पिछले 10 सालों में इरफ़ान खान की कोई भी फिल्म रिलीज़ होती, और यहाँ के लोग 30 किलोमीटर की दूरी टी कर नासिक पहुँच जाते. वजह होती, इरफ़ान खान की फिल्म. जो ऐसा नहीं भी कर पाते, उन्हें इंतज़ार रहता अपने इस हीरो की फिल्म के टीवी पर आने का.यहाँ के लोगों के लिए इरफ़ान सिर्फ एक फ़िल्मी हीरो ही नहीं, उनकी जिंदगियों को बदलने वाले नायक हैं. वजह जानना चाहते हैं? आइये जानते हैं क्यों हैं इन आदिवासियों के लिए इरफ़ान खान इतने खास?

अब से दशक भर पहले इरफ़ान खान ने वीकेंड बिताने के मकसद से एक फॉर्महाउस बनाना चाहा. इसके लिए उन्होंने इगतपुरी में ज़मीन पसंद की. इगतपुरी में इरफ़ान के इस आशियाने के आसपास का इलाका कुछ आदिवासी बस्तियों का घर है, जैसे कि त्रिंगलवाड़ी, कुशगाँव, मोरले और पारदेवी, जहाँ गाँव के स्कूलों में नाममात्र की सुविधाएँ हैं. इस पिछड़े इलाके में जिला परिषद् के सदस्य गोरख बोडके ने इरफ़ान से एक एम्बुलेंस इलाके को दान करने का अनुरोध किया तो इरफ़ान ने तुरंत उनकी अर्जी स्वीकार ली. कुछ ही महीनों में इरफ़ान इस इलाके के विकास में गहरी दिलचस्पी लेने लगे. बोडके इरफ़ान को याद करते हुए बताते हैं, “वे इस इलाके के अभिभावक हो गए. इरफान खान कई परिवारों के लिए एक फरिश्ते थे. जब भी किसी को मदद की ज़रूरत हुई, उसे इरफ़ान ने निराश नहीं किया.”

यहाँ के गांवों में पढने वाले बच्चों को इरफ़ान हर साल ढेरों कापियां, किताबें, रेनकोट, स्वेटर भिजवाते थे. यहाँ के बच्चे भी दुनिया के साथ कदम से कदम मिला कर चल सकें, इसके लिए इरफ़ान ने यहाँ के छात्रों को दर्जन भर कंप्यूटर भी दिए. इतना ही नहीं, ख़ास मौकों और त्योहारों पर इरफ़ान यहाँ मिठाइयाँ भी भिजवाते थे. हालाँकि यहाँ के लोगों ने इरफ़ान को कैंसर का पता चलने के बाद ज्यादा नहीं देखा, लेकिन जिस दिन लोगों को इरफ़ान के दे’हांत की खबर मिली, ये पूरा इलाका गम के समन्दर में डूब गया. बोडके कहते हैं, “वो फ़रिश्ता, जिसने यहाँ के लोगों की जिंदगी बदल दी, यहाँ के छात्रों को ऊपर उठाने में मदद की, हम उसे अपने तरीके से श्रद्धांजलि देना चाहते हैं. यहाँ के लोगों ने मिलकर ये तय किया है कि हम इस इलाके का नाम अपने हीरो के नाम पर रखेंगे. हम यहाँ का नाम बदल कर ‘हीरो-ची-वाड़ी’ रख रहे हैं. मराठी में इसका अर्थ होता है ‘एक नायक का पड़ोस”.

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