आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एलजी पॉलिमर इंडस्ट्री में रासायनिक गैस रिसाव दुर्घ’टना के पांच दिन बाद भी यहां के हालात अभी सुधरे नहीं है. हवा में गैस का असर अभी भी देखा जा रहा है. इस पूरे मामले की जांच कर रहे विशेषज्ञों के मुताबिक गैस रिसाव से हवा में होने वाला असर अभी लंबे समय तक बना रहेगा. ऐसे में कंपनी के आसपास के इलाकों में अभी कुछ दिनों तक किसी को भी रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. आंध्र प्रदेश के उद्योग मंत्री मेकापति गौथम रेड्डी ने बताया कि राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के विशेषज्ञों के पैनल ने बताया है कि एलजी पॉलिमर इंडस्ट्री में रासायनिक गैस रिसाव का दुष्प्रभाव दीर्घकालीन है.

अभी काफी समय तक यहां रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता होगी. रेड्डी ने बताया कि राज्य सरकार ने एलजी पॉलिमर इंडस्ट्री के आसपास के कई किलोमीटर में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाये हुए है. इसके साथ ही इस कारखाने के आसपास रहने वाले 13 हजार से अधिक लोगों को दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया गया है. बता दें कि गुरुवार सुबह विशाखापट्टनम स्थित एलजी पॉलिमर इंडस्ट्री के कारखाने में गैस रिसाव के कारण 11 लोगों की मौ’त हो गई थी जबकि 5 हजार से अधिक लोग बीमार हो गए थे. इनमें से 300 लोगों की हालत काफी गंभीर थी.

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्लांट के आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों को खाली करा दिया गया था. स्टाइरीन गैस पर काबू पाने के लिए गुजरात से मंगाए गए पीटीबीसी (पैरा-टर्शरी ब्यूटाइल कैटेकोल) का छिड़काव किया गया था. आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित एलजी पॉलिमर इंडस्ट्री के कारखाने में गुरुवार देर रात गैस लीक होने से हुई 11 लोगों की मौत के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख किया है. एनजीटी ने एलजी पॉलिमर्स, पर्यावरण मंत्रालय, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज और सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को नोटिस जारी हुए हा’दसे से हुए नुकसान के लिए एलजी पॉलिमर्स को प्रारंभिक राशि के तौर पर 50 करोड़ रुपये जमा करने के निर्देश दिए.