हिमाचल प्रदेश में घटी केरल जैसी घटना, अब इस पशु को खिलाया गया पटाखे भरा आटे का गोला

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अभी केरल के पलक्कड जिले में गर्भवती हथिनी को विस्फो’टक भरा नारियल खिला कर ‘मारने का मामला गर्माया हुआ ही है कि ऐसी ही एक और दर्द’नाक खबर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से आ रही है. इस बार अमा’नुष तत्वों का निशाना एक गाय बनी है. हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में इस घट’ना को 26 मई को अंजाम दिया गया. बिलासपुर के जन्दुट्टा इलाके में गेंहू के आटे में बड़ा पटाखा छिपा कर गाय को खिला दिया गया. गाय ने जैसे ही आटे के गोले को चबाने की कोशिश की, वैसे ही पटाखा उसके मुंह में ही फट गया, जिससे गाय का आधे से ज्यादा बेहद बुरी तरह घा’यल होकर क्षत-वि’क्षत हो गया.

बताया जा रहा है कि विस्फो’टक भरा फल खाने वाली हथिनी के म’रने के बाद इस गाय के उड़े हुए चेहरे की तस्वीर भी हिमाचल में वायरल हो गयी. हिमाचल प्रदेश में इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खि’लाफ कार’वाई की मांग की जा रही है. जब एसपी बिलासपुर दिवाकर शर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि इस मामले में, एक अत्यधिक विस्फो’टक पटाखा, “आलु बम” को गेहूं के आटे के गोले के अंदर रखा गया था,  जिसे चबाते ही गाय के मुँह में वि’स्फोट हो गया. इस मामले में पशु क्रू’रता निवारण अधिनियम 286 के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा कि मामले के मुख्य आ’रोपी और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है.

बताते चलें कि भारत में किसान सामान्यतया जंगली जानवरों से अपनी फसलों को बचाने के लिए ऐसी ही युक्ति अपनाते हैं. वे फसलों पर ह’मला करने वाले जानवरों को मा’रने के लिए गेहूं के आटे के गोले में पटाखे लगा कर रख देते हैं. आमतौर पर यह युक्ति जंगली सूअरों से खेतों को बचाने के लिए अपनाई जाती है. एक वन अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि शिकारियों ने भी जंगली सूअरों को मा’रने के लिए इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया है, लेकिन कभी-कभी घरेलू और आवारा जानवर भी इस तरह की रणनीति का शि’कार हो जाते हैं.