गुजरात में 19 जून राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. तीन विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस अब पूरी तरह साव’धानी बरत रही है. रविवार को गुजरात कांग्रेस ने अपने 19 विधायकों को राजस्थान के एक रिसॉर्ट में रहने के लिए भेज दिया है. कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि पार्टी राजस्थान के माउंट आबू में स्थित रिसॉर्ट में 26 विधायकों को स्थानांतरित करने की उम्मीद है. राजस्थान कांग्रेस शासित प्रदेश है और पार्टी को उम्मीद है कि ये विधायक यहां भाजपा की खरीद-फरोख्त से दूर रहेंगे. गुजरात में कांग्रेस के 65 विधायक हैं, इनमें से कुछ पहले से ही अलग-अलग रिसॉर्ट में रखे गये हैं. पार्टी ने अपने दो विधायकों के 4 जून को इस्तीफा देने के बाद यह कदम उठाया है. इसके एक दिन बाद एक और विधायक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. पार्टी में यह इस्तीफों का दूसरा दौर था.

मार्च महीने में राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद ही पार्टी के चार विधायकों ने उस समय इस्तीफा दे दिया था. आबू रोड में गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावडा ने संवाददाताओं से कहा, ‘कोरोनावायरस संकट के चलते जहां सरकार को लोगो के जीवन का बचाने का काम करना चाहिए वहीं सरकार इस वक़्त सरकारी मशीनरी का उपयोग करके जनप्रतिनिधियों को धम’काने और खरीद फरोख्त का काम कर रही है. हमारे विधायक आगामी रणनीति पर विचार करने लिए यहां ठहरे हुए हैं.’ राज्य की 183 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ बीजेपी के 103 सदस्य हैं और उसने राज्यसभा चुनाव में अभय भारद्वाज, रामीलाबेन बारा तथा नरहरि अमीन को उतरा है.

कांग्रेस सदस्यों की संख्या घटकर 65 हो जाने के बाद पार्टी को दो राज्यसभा सीटें जीतने में मुश्किल आ सकती है, जिनके लिए उसने वरिष्ठ नेता भरत सिंह सोलंकी और शक्तिसिंह गोहिल को उतारा है. कांग्रेस के एक विधायक ने कहा कि सोलंकी, गोहिल के बाद दूसरी प्राथमिकता में हैं. कांग्रेस विधायक विक्रम मदम ने कहा, ‘सभी 65 विधायक एकजुट हैं. कांग्रेस में कोई भीतरी गुटबाजी नहीं है. भरत सिंह सोलंकी खुद जानते हैं कि वह दूसरे उम्मीदवार हैं.’ उन्होंने कहा, ‘यह पार्टी का फैसला है. हम पार्टी के निर्देशानुसार वोट डालेंगे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित भाई चावडा ने भी घोषणा की है कि शक्ति सिंह पहले उम्मीदवार हैं.’ सदन की प्रभावी संख्या इस समय 172 है, क्योंकि 10 सीटें अदा’लतों के मामलों तथा इस्तीफों के कारण खाली हैं.