कोरोना वायरस के डर का ये आलम है कि जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है, वे भी फ्री जांच वाले कैम्पों में पहुँच कर बार बार जांच करवा रहे हैं. ऐसे लोगों के लिए अब प्रशासन सख्त हो रहा है. एक व्यक्ति का केवल एक बार ही कोरोना टेस्ट किया जाएगा. अगर किसी ने अपनी पहचान छिपाकर दोबारा टेस्ट कराया या सैंपल दिया तो उसके खि’लाफ कार्र’वाई की जाएगी. सिविल सर्जन ने स्वस्थ्य अधिकारियों को इस बारे निर्देश जारी किए हैं.

सिविल सर्जन वीरेंद्र यादव ने बताया कि आईसीएमआर की नई गाइडलाइंस के अनुसार, एक व्यक्ति की केवल एक बार ही कोरोना जांच की जाएगी. केवल संभावित मरीजों की ही दोबारा जांच की जाएगी. एक से ज्यादा जांच न करवाने के पीछे तर्क है कि जितने लोगों के भी सैंपल लिए जाते हैं उन सभी का रिकॉर्ड आरोग्य सेतु ऐप और आईसीएमआर पोर्टल पर अपलोड किया जाता है. साथ ही उन मरीजों के आधार नंबर भी फीड किए जाते हैं. एक व्यक्ति एक बार सैंपल देता है तो उसकी डिटेल सरकार को जाती है. उसी व्यक्ति ने दोबारा जांच करवाई तो एक ही डेटा दो बार हो जाता है.

स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता डॉक्टर जेपी का कहना है कि इन दिनों विभाग की ओर से अलग-अलग एरिया में कैंप लगाकर फ्री जांच की जा रही है. फील्ड के स्टाफ से जानकारी मिलती है कि फ्री के चक्कर में बहुत से लोग एरिया बदलकर जांच करवाने पहुंच जाते हैं. डाक्टर जेपी बताते है कि अगर किसी व्यक्ति ने एक बार सैंपल दिया ओर जांच में निगेटिव पाया जाता है और उसी व्यक्ति में 2 महीने बाद कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो उसकी जांच होगी. यह आदेश केवल बार-बार जांच कराने वालों के लिए है.