तुर्की के इतिहास में आज का दिन हमेशा याद किया जाएगा, आज हागिया सोफ़िया यानी आया सोफ़िया मस्जिद में पहली नमाज़ अदा की गई । आज यहां पहले जुमे की नमाज़ अदा की गई। यह बेहद खास और मुबारक़ दिन सिर्फ तुर्की ही नही बल्कि दुनियाभर के मुस्लिमों के लिए भी है। तुर्की के मुस्लिम बड़ी तादाद में सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए नमाज़ अदा की गई। सभी ने नमाज़ के बाद तुर्की की फतेह के लिए अल्लाह का शुक्र अदा किया। साथ ही दुनिया की खैर के लिए दुआए की गई। नमाज़ के बाद सभी नमाज़ियो ने दुरूद ओ सलाम पढ़ा।

म्युज़ियम के तैर पर संचालन के 86 सालों के बाद, इस्तांबुल के हागिया सोफिया आज यानी जुमे के पाक दिन एक मस्जिद के रूप में फिर से खुलेंगी। आज यहां पहली नमाज़ पढ़ी जाएगी। एक कदम जो ना सिर्फ तुर्की में बल्कि दुनिया भर में मुसलमानों के लिए बेहद ही खास और मुबारक़ दिन है।

एक मस्जिद में प्राचीन संरचना के प्रत्यावर्तन की मेजबानी करने के उत्साह के साथ, इस्तांबुल सामाजिक भेद और इस्लामी नियमों दोनों के मुताबिक़ सख्त उपायों और सोशल डिस्टनसिंग के साथ एक ग्रैंड उद्घाटन किया गया।

गुरुवार को इस्तांबुल के गवर्नर अली येरलिकाया ने कहा, “हम जानते हैं कि यह हमारे मुस्लिम भाईयों की एक बड़ी आरज़ू पूरी हुई है। हागिया सोफ़िया सिर्फ तुर्कों के लिए ही नही बल्कि दुनियाभर के हर एक मुस्लिम के दिन के करीब है।

यर्लिकाय ने कहा कि सभी को इबादत के लिए पर्याप्त समय देने के लिए, मस्जिद सुबह 10 बजे ज़ायरीनों के लिए अपने दरवाजे खोलेगी और अगली सुबह तक खुली रहेगी।

उन्होंने आगे कहा कि, कोरोना महामा’री के कारण, मस्जिद के भीतर और आसपास के पांच स्थान, जिनमें से दो महिलाओं के लिए हैं, इबादत क्षेत्रों के रूप में निर्धारित किए गए हैं।” ताकि कोई सामाजित दूरी को मद्देसनज़र नमाज़ अदा कर सके।