अयोध्या में रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने की तैयारी चल रही है. जिसके लिए 5 अगस्त को भूमिपूजन भी होने वाला है. भूमि पूजन के लिए देश भर से कई पवित्र नदियों और स्थानों का पानी और मिट्टी अयोध्या पहुंचाए जा रहे हैं. ऐसे में एक बार फिर मुस्लिम समुदाय परस्पर सौहार्द की मिसाल कायम करने जा रहा है. ये मिसाल कायम करने जा रहे हैं रायपुर के रहने वाले फैज़ खान. फैज़ भगवान राम के ननिहाल की मिट्टी को अयोध्या लेकर जाने वाले हैं. रायपुर के चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर की मिट्टी लेकर फैज 23 जुलाई को अयोध्या के लिए रवाना हुए हैं. वे पांच अगस्त को राम जन्मभूमि भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे और माता कौशल्या मंदिर की मिट्टी समर्पित करेंगे.

हालाँकि इसे लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है. वाराणसी के श्री विद्यामठ में शंकराचार्य के प्रतिनिधि स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद सरस्‍वती ने फैज़ के हाथों आ रही राम के ननिहाल की मिट्टी को लेने का विरो’ध किया है. उनका कहना है कि मुस्लिम के हाथ की मिट्टी राम जन्मभूमि भूमिपूजन में शामिल नहीं की जानी चाहिए. स्वामी सरस्वती ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण हिंदुओं के लंबे सं’घर्ष और एकजुटता के बाद संभव हो पाया है. किसी मुस्लिम के हाथ की मिट्टी भूमि पूजन में शामिल नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने आ’रोप लगाया कि केंद्र सरकार ट्रस्ट के निर्माण में भेद’भाव कर रही है. इसको लेकर रामालय ट्रस्‍ट अब अदा’लत का रुख करेगा.

वहीँ इस मामले पर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया कि मिट्टी मां है. किसी मुस्लिम के छूने से अशुद्ध नहीं हो जाती है. मुस्लिम राम भक्तों की लायी मिट्टी पवित्र है. हर व्यक्ति अपनी आस्था से मंदिर निर्माण में अपना योगदान दे रहा है. राय ने कहा कि मिट्टी निमित्त मात्र है. मुस्लिम युवक केवल मिट्टी लाने का काम कर रहा है. उन्होंने सवाल किया कि किसी के छूने भर से मिट्टी अशुद्ध हो जाती है क्या? राय ने कहा कि यह निरर्थक सवाल है. यह समाज के अंदर झग’ड़े पैदा करने की मानसिकता को दिखाता है. इससे पहले संपत राय ने स्पष्ट किया कि जिस मिट्टी पर हम चलते हैं, उसी मिट्टी पर मुस्लिम भी चलते हैं, तो क्या वह मिट्टी अपवित्र हो जाएगी.