अगर आपने ‘बंटी और बबली’ फिल्म देखी हो तो आपको याद होगा कि कैसे इन दोनों की जोड़ी हेरा’फेरी करते-करते ताजमहल बेचते तक पहुँच जाती है. ऐसा ही एक मामला अलीगढ में देखने को मिला है जिस पर अब ब’वाल खड़ा हो गया है. लेकिन जरा रुकिए…यहाँ ताजमहल नहीं बेचा जा रहा है. हुआ ये है कि अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग कॉलेज के बाहर भारतीय वायुसेना के प्रतीक के रूप में खड़े हुए फाइ’टर प्लेन को किसी व्यक्ति ने ‘ओएलएक्स’ साइट पर बेचने के लिए विज्ञापन दे डाला. जिसमें इसकी कीमत 9 करोड़ 99 लाख 99 हजार 999 रुपये बताई गयी है. ये विज्ञापन कल 3 अगस्त को ही ओएलएक्स पर पोस्ट किया गया. जिसके बाद देखते ही देखते ये मामला सोशल मीडिया पर फ़ैल गया. मामला गर्माते ही पोस्ट करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने दोपहर बाद इस पोस्ट को डिलीट भी कर दिया. फिलहाल एएमयू प्रॉक्टर ने इस पूरे मामले में जांच कर कार्र’वाई की बात कही है.

इस प्लेन के इतिहास और अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़ने की बात करें तो पता चलता है कि इंडियन एयरफोर्स ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को साल 2009 में माइक्रो यान मिग-23 गिफ्ट किया था. इसको एएमयू के इंजीनियर विभाग के बाहर एक प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया. इसका इस्तेमाल एयरफोर्स ने कई यु’द्धों में किया था. लगभग 28 साल तक इंडियन एयरफोर्स में रहने के बाद इस प्लेन को एएमयू को भेंट में दे दिया गया. अब प्लेन बेचने के इस मामले पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. मोहम्मद वसीम अली का कहना है कि उन्हें भी इस बात की जानकारी कहीं से मिली है कि किसी ने इंजीनियरिंग कॉलेज के सामने खड़े इस विमान को बेचने के लिए इन्टरनेट पर विज्ञापन दिया है. इसके बारे में इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल साहब से भी बात हुई तो उनको भी इस मामले की जानकारी नहीं है. यह बिलकुल फ’र्जी है. एएमयू ने न ऐसा कोई विचार किया है, न ही ऐसा कोई विज्ञापन दिया है.साथ ही इस मामले की जांच की जा रही है.