द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, इसकी मदद से भविष्य में हाइपरसोनिक क्रूज़ मि’साइल और व्हीकल विकसित किए जा सकेंगे.डीआरडीओ ने अपने इस मिशन को ऐतिहासिक क़रार दिया है. डीआनडीओ ने ट्वीट कर कहा, “इस मिशन के साथ ही ये साबित हो गया है कि डीआरडीओ बेहद पेचीदा तकनीक के क्षेत्र में उम्दा प्रदर्शन कर सकता है.”

वहीं डीआरडीओ के चेयरमैन जी.सतीश रेड्डी ने कहा कि ये भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल करता है, जिन्होंने इस तकनीक का प्रदर्शन किया है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ को इस कामयाबी पर बधाई दी. राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा, “डीआरडीओ ने आज स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग कर हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. ये औद्योगिक जगत के साथ अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक वाहनों के निर्माण का रास्ता खोलने वाला है.”


विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस होते हुए मंगलवार को ईरान पहुंचेंगे, जहां वो एसीसीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे. वो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बाद दूसरे कैबिनेट मंत्री हैं जो मॉस्को यात्रा से लौटते हुए तेहरान में रुकेंगे.

वहीं अधिकारियों का कहना है कि ईंधन भरने के लिए तकनीकी कारण से तेहरान में रुकना पड़ा, जयशंकर वहां अपने समकक्ष जावेद ज़रीफ से मिलेंगे. महामारी के बाद ये उनकी पहली बैठक होगी. महामारी के बाद विदेश मंत्री पहली बार देश से निकले हैं.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, सोमवार को विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर स्थिति “बहुत गंभीर” है और राजनीतिक स्तर पर “गहन बातचीत” की ज़रूरत है.

आगामी दौरे का फोकस जयशंकर और वांग यी के बीच बैठक और पूर्वी लद्दाख के संकट के समाधान की संभावना पर होगा. ज़रीफ के साथ छोटी बैठक होगी, लेकिन उतनी ही महत्वपूर्ण होगी.