वॉशिंगटन में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो। पोम्पियो ने साफ कर दिया कि अमेरिका चाहता है कि इस’राइ’ल और सऊदी अरब भी अब कूटनीतिक रिश्ते बहाल करें।

अमेरिका खाड़ी देशों और इस’राइ’ल के बीच अमन बहाली की कोशिशों के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यूएई और बहरीन के बाद अब सऊदी अरब भी इस’राइ’ल के साथ शांति समझौता कर सकता है। अमेरिका इसमें मध्यस्थता कर रहा है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं। बुधवार रात उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से मुलाकात की। इसके बाद दोनों नेता मीडिया से रूबरू हुए।

अमेरिका और सऊदी के बीच इस’राइ’ल को लेकर बातचीत चल रही है। इस मसले को पोम्पियो ने साफ तौर पर माना। कहा- हम चाहते हैं कि यूएई और बहरीन की तरह सऊदी अरब भी इस’राइ’ल के साथ कूटनी’तिक रिश्ते कायम करे। हमें पूरी उम्मीद है कि सऊदी सरकार इस बारे में गं’भीर’ता से विचार कर रही है। हम यह उम्मीद भी करते हैं कि सऊदी अरब फिलिस्तीनी नेताओं को इस’राइ’ल से बातचीत के लिए तैयार करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खाड़ी देशों और इस’राइ’ल के बीच कूटनी’तिक रिश्ते कायम कराने की कोशिशों में जुटे हैं। यूएई, बहरीन और कतर ऐसा कर चुके हैं। लेकिन, सऊदी अरब के बिना यह कोशिश अधूरी है। ट्रम्प इसे अब्राहम अकॉर्ड कहते हैं। इसका मकसद मध्य-पूर्व यानी मिडल ईस्ट में अमन बहाली है। इस’राइ’ल ने भी अपना रुख नर्म किया है। यूएई से समझौते के बाद इस’राइ’ल की नेतन्याहू सरकार ने वेस्ट बैंक में यहूदी को बसाने का मिशन कुछ वक्त के लिए टाल दिया।

एक तरफ चीन है जो ईरान को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहा है। ईरान यमन के वि’द्रोहि’यों की मदद कर रहा है। ये सऊदी अरब की सीमा से लगे इलाकों में हम’ ले कर रहे हैं। अब अमेरिका इस’राइ’ल और सऊदी अरब को साथ लाकर ईरान पर दबाव बनाना चाहता है। उसने पर’मा’णु ह’थिया’र कार्यक्रम को लेकर ईरान पर नए प्रतिबं’ध भी लगाए हैं।