सऊदी अरब की अदालतों के आदेश पर दी जाने वाली कोड़े मारने की सजा की लंबे समय से मानवाधिकार संगठन निं’दा करते आये हैं. इस सजा को अब ख’त्म कर दिया गया है.

सऊदी अरब ने को’ड़े मा’रने की स’जा को ख’त्म कर दिया है. देश के मानवाधिकार आयोग ने इसकी घोषणा की. आयोग ने इसे इसे देश के राजा और उनके बेटे के शुरू किये गए सुधार कार्यक्रम में “आगे की ओर बढ़ाया गया एक बड़ा कदम” कहा. सऊदी अरब की अदालतों के आदेश पर दी जाने वाली को’ड़े मा’रने की स’जा की लंबे समय से मानवाधिकार संगठन निं’दा करते आए हैं. कभी कभी दो’षियों को सैकड़ों को’ड़े मा’रे जाते हैं.

हालांकि मानवाधिकार समूहों का यह भी कहना है कि प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की देख रेख में होने वाले कानूनी सुधारों की वजह से देश में सरकार से असहमति के दमन में कोई कमी नहीं आई है. मौ’त की स’जा अभी भी मौजूद है और उसका इस्तेमाल भी शासन के खिला’फ उठने वाली आवाजों को शांत करने के लिए होता है.

मानवाधिकार आयोग का कहना है कि इस नए सुधार के के बाद अब किसी भी अ’परा’धी को को’ड़े मा’रने की स’जा नहीं सुनाई जाएगी. आयोग के अध्यक्ष, अवाद अल-अवाद ने कहा, “यह निर्णय इस बात की गारंटी है कि जिन अप’राधि’यों को पुराने कानून के तहत को’ड़े मा’रने की स’जा सुनाई जा सकती थी, उन्हें अब उसकी जगह से जु’र्माना या जे’ल की स’जा होगी.”

इसके पहले अदालतों को यह अधिकार थी कि वे कई तरह के जु’र्म के दो’षी पाए जाने वालों को को’ड़ों की स’जा सुना सकती थीं. इनमें विवाह के बाहर यौन संबंध और शांति को भंग करने से ले कर ह’त्या जैसे जुर्म शामिल हैं. भविष्य में जजों को जुर्मा’ना, जेल की स’जा या समाज सेवा जैसे विकल्पों में से चुनना होगा.